Monday, 28 September 2015

बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ


बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ
एही हो चुनाव से चलत रोटी रोजी हौ
गाड़ी चार पहिया से रोजे सफर बा
वोटिया से जादे नोटिये पे नजर बा
कहीं ईंट पत्थर कहीं चलत गोजी हौ
बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ
खेत कियारी क चिंता भुलायल बा
बिन बरसात हो धनवा सुखायल बा
घर परिवार सबे लागल चुनाव में
पेटवा में बेटवा भी बहुत अकुलायल बा
कोई जिंदाबाद नेता कहे कोई लोभी हौ।
बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ।
कोई कहे हम रस्ता पएड़ा बनवाइब
कोई हैण्डपम्प समरसेबुल लगवाइब
कोई बोले चकबंदी में करब समर्थन
जितब चुनउआ जमिनियां नपवाइब
हँसत बा बहुत जे इनकर भुक्तभोगी हौ
बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ ।।
आपन समीकरण बतावत बा कोई
वोटिया क गिनती करावत बा कोई
कोई मीट मुर्गा पे भयल हौ निर्भर
इंग्लिस औ देशी लगावत बा कोई
लडिजा चुनाव "यश" तोहार बड़ा तेजी हौ
बाऊ समर्थक हउअन बेटवा विरोधी हौ।।
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साभार © प्रवीन यादव"यश"(पत्रकार)
9450112497

Thursday, 24 September 2015

सदियों पुरानी परंपरा को क्यों समाप्त करने पर तुले हैं माननीय? तो क्या ऐसे साफ रखेंगे माँ गंगा का जल?

प्रवीन यादव'यश', वाराणसी
9450112497

वाराणसी। जनपद के गोदौलिया चौराहे पर गणेश जी की प्रतिमा गंगा में विसर्जित करने के लिए धरनारत साधू संतों काशीवासियों पर  मंगलवार को मध्यरात्रि में जिस तरीके से अनवरत लाठियां बरसाईं गयी उसकी जीतनी निंदा की जाए कम है।
गंगा माँ को स्वच्छ करने का संकल्प लिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन क्या हिन्दू धर्म के रीती रिवाजों को कटघरे में खड़ा करके माँ गंगा को स्वच्छ करना कहा का न्याय है।

आज भी गंगा में अनगिनत जगहों से गंगा के निर्मल जल में मलजल मिल रहे हैं साथ ही तमाम फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी भी गंगा और वरुणा के जल को दूषित कर रहा है। इसपर विचार किये बगैर गंगा में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगाया जाना बहुत गलत है।

माननीय उच्च न्यायलय के आदेश का हवाला देते हुए अधिकारी माँ गंगा में मूर्ति विसर्जन को रोकने के लिए तैयार खड़े हैं लेकिन पूजा समितियों द्वारा भी यही रट लगाया जा रहा है कि मूर्तियों को गंगा में ही विसर्जित करेंगे ऐसे में प्रसाशन द्वारा तालाबों और कुंडों को मूर्ति विसर्जन के लिए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है तथा तालाब और कुण्ड को मूर्ति विसर्जन के लिए तैयार किया जा रहा है ऐसे में प्राचीन तालाब और कुण्ड में यदि मूर्ति विसर्जित किया गया तो क्या तालाबों और कुंडो का अस्तित्व बच पायेगा? इसका उत्तर बहुत ही चौकाने वाला है।

अगले रास्ते के रूप में प्रसाशन द्वारा गंगा नदी के किनारे वैकल्पिक तालाब बनाया गया है और तर्क दिया गया है की इसी तालाब में मूर्तियां विसर्जित की जाएँगी तो यहाँ एक बात नहीं समझ में आती है कि गंगा का जलस्तर जब बढ़ेगा तो वह इस तालाब को अपने आगोस में ले लेगा और मूर्तियों सहित तालाब का जल गंगा में मिल जायेगा तब क्या होगा? यह भी एक बड़ा प्रश्न है।

हिन्दू धर्म में कई ऐसी परम्पराएँ,रीती-रिवाज और आस्थाएं हैं जो पूरी तरह माँ गंगा से सीधे जुडी हैं जैसे मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह किया जाना भी सम्मिलित है। कल कोई यदि यह तर्क दे दिया कि इनके कारण भी गंगा का जल दूषित हो रहा है तो क्या यह सब भी बंद करा दिया जायेगा?

फ़िलहाल प्रसाशन द्वारा कोई अन्य विकल्प तैयार किया जाना चाहिए जैसे पूजा पंडालों में स्थापित की जाने वाली मूर्तियां पुआल और मिट्टी की जगह केवल मिट्टी से ही बनायीं जानी चाहिए और केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए इसके बाद मूर्ति को माँ गंगा के जल में प्रवाहित करने के लिए लगाया गया रोक हटा देना चाहिए।

और अंत में प्रसाशन को यह भी ध्यान देना बहुत जरुरी है कि संत महात्माओं पर लाठी चलाने से पहले सौ बार सोच लेना चाहिए क्योंकि ऐसा किये जाने के बाद मानवीय भावनाएं तो आहत हुई ही हैं लोगों में एक प्रतिशोध की ज्वाला भी भड़क उठी है जो यदि सडकों पर आ गई तो काबू पाना शायद ही संभव होगा और काशी की गंगा-जमुनी तहजीब पर भी इसका बहुत ज्यादा असर होगा और फिर जलती हुई आग में घी डालने के लिए सोशल मीडिया भी बहुत बड़ा योगदान करेगा।

नोट:- लेख के माध्यम से किसी के भी भावनाओं को आहत पहुचाने का काम नहीं किया गया है फिर भी कहीं गलत है तो लेखक क्षमा प्रार्थी है।

Tuesday, 26 May 2015

तो जनाब,सोशल मीडिया आपकी फसल चौपट कर देगी।

वाराणसी। आधुनिक समय में​ जितनी तेजी से सोशल मीडिया युवाओं को लुभा रही है उतना अधिक शायद ही कोई अन्य चीज लूभा रहा हो। मीडिया में सरकार के अधीन हो कर किये जा रहे विज्ञापनों और उनके समर्थन में चल रही झूठी खबरों का जवाब देने के लिये सोशल मीडिया ही सबसे नायाब तरीका है आप की मठाधीशी खतम हो जायेगी। अभी जिस प्रकार से यह उपजाऊ खेत में पैसे उग रहे हैं उसी तरह से आने वाले समय में सोशल मीडिया की मार पड़ते ही यह उपजाऊ भूमि बंजर होने वाली है। 

इसकी भनक बहुत से लोगों को पहले ही लग चूकी है और वे सोशल मीडिया पर अपने पॉव मजबूती से जमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं होने वाला क्योंकि जब आप सोशल मीडिया से जूड जायेंगे और झूठी खबरें चलायेंग तो उसका तत्कालिक जवाब भी आपके साईट पर मि​ल जायेगा इसलिये अभी भी मौका है क्यों नहीं सावधान हो जाते हैं यदि अभी नहीं सावधान हुए तो अन्त समय में विश्राम करने के अलावा कोई अन्य काम नहीं रह जायेगा आपके पास। आज समय ऐसा हो गया है कि विदेश में कोई चाटा खाता है तो उसकी गूंज सोशल मीडिया पर जरूर सुनाई देती है और कई दिनों तक गुंजती रहती है। 

गिने चुने संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को खुब शोषण किया है इसी कारण एक तरफ मजीठिया उनके कमर तोड़ रही है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया उनको आईना दिखा रही है ऐसे में आने वाला कल उनके लिये बहुत ही कष्टकारी होगा अभी से यह चर्चा होने लगी है कि उनकी उपजाऊ जमीं को बंजर बनते देर नहीं लगने वाली है।

तो, नेता जी आपको भी सुधरना होगा।
इसका असर केवल ​मीडिया जबत पर ही नहीं बड़बोले नेताओं पर भी रहेगा और आने वाले समय में उनको अपने जुबान पर लगाम लगाने की बहुत ही आवश्यकता हो जायेगी क्योंकि वहॉ आपकी जूबान फिसलेगी तो यहॉ आपकी लंगोट तक खींच देंगे सोशल मीडिया के सिपाही। जिस प्रकार से अनाप सनाप बकते वाले लोग नेता बनकर पढ़े लिखे लोगों के उपर अपना राज चलाते हैं और जूते की डोरी तक बंधवाने में कोई शर्म महसूस नहीं करते उन लोगों नाड़ा खोलने की तागत सोशल ​मीडिया के पास है और वे अपनी इस कर​तूत से खुद ब खुद शर्मिंदा हो जायेगे। राजनीति में भी काफी सुधार आयेगा यह ताकत अब सबके सामने है क्योंकि गोंडा के मंत्री जी चिल्लाते और गरियाते हैं तो सोशल ​मीडिया के माध्यम से गुजरता तक उसकी गूंज सुनायी देती है। 

लेखक 
प्रवीन यादव "यश"

साहब! विज्ञापन पैसे को खा रहा, नेता देश को खा रहे, लेकिन जनता भूखे मर रही है ?

वाराणसी। अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या यूॅ केहें मोदी सरकार अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपया किसी जनपद के पीछे खर्च कर दिया गया होता तो वह दुनियॉ का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमों के कामों की बोली बंद कैसे हो गयी।
केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेस के दौरान बताया कि यह एक समस्या है। लेकिन इसका हल ढूंढा गया है और अब इसमें काफी कमी आयी है। विवादास्पद बयान देने वाले नेताओं को उनकी जिम्मेदारी समझायी गयी है। लेकिन अनाप सनाप बाते मंच से बोल देने वाले इनके नेताओं और मंत्रियों की जुबान पर क्या सचमुच लगाम लग जायेगी यह तो भविष्य के गर्भ में है।
नमों सरकार ने सफाई अभियान चलाया देश को साफ सुथरा बनाने के लिये संकल्प दिलवाया गया बनारस की एकाध गलियों से लेकर घाटों तक की सफाई करते हुए मोदी ​मीडिया के विश्व पटल पर कई दिनों तक छाये रहे लेकिन आज एक वर्ष गुजर जाने के बाद उस स्थान को देखा जाय तो क्या वहॉ या उन गलियों में गन्दगी नहीं है जहॉ मोदी ने सफाई किया था जरूर है।
झूठ की बहाने बाजी अखबारों और चैनलों में पैसे के बल पर छाये रहना कोई मतलब नहीं रखता इन भोली भाली जनता पर।

इनके 8.67 करोड़ भक्त इनका प्रचार नहीं कर पाते हैं क्या?
मोदी सरकार में सबसे बड़ी यह बात देखने को आयी कि जब पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ रही थी उस समय भी मीडिया को बहुत अच्छे तरीके से मैनेज किया गया और इस समय भी ​मीडिया को काफी अच्छे तरीके से मैनेज किया जा रहा है लेकिन आज भी कुछ ऐसे समाचार पत्र और चैनल वाले हैं जो सीना ठोककर यह बता रहे हैं कि मोदी ने कुछ नहीं किया सिवाय बयानबाजी के।

इनके सांसद इस समय टीवी और अखबार पर ही दिखाई देते हैं क्षेत्र के लोग अपने आप को छला महसूस कर रहे हैं साथ ही यह भी कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो हम नोटा ही दबा कर आये होते जब एक आदमी से पूछा गया कि सांसद जी कुछ कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मेंढक तो बरसात होने के बाद भी दिखाई देते हैं और उसी समय टर्र टर्र टर्र टर्र भी करते हैं। देश में 8.67 करोड सदस्यों को अपने से जोडने के बाद यह दुनियॉ की सबसे बडी पार्टी का तमगा हासिल कर लिया यहॉ सवाल यह भी लाजमी है कि क्या उनके सदस्य उनका प्रचार नहीं करते हैं उनके काम के बारे में जनता को नहीं बताते हैं आखिर क्यों इतना रूपया सरकार को खर्च करना पड रहा है अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिये

ये जो पैसे खर्च करे नमों ने यह बताया है कि हमने साल भर में क्या क्या किया क्या वह उनकी पैतृक सम्पत्ति थी, अभी देश भर में दौड़ लगा रहे हैं क्या वह अपने पैसे से दौड़ रहे हैं?

नहीं यह धन सवा सौ करोड़ देशवासियों का है और देश के जनता की गाढ़ी कमाई है मुझे पता है यह मीडिया जब भौंकती है तो आप उसपर प्रसाद स्वरूप विज्ञापन परोस देते हैं और सच्चाई जनता के सामने आने से छूपी रहती है लेकिन सोशल मिडिया भी एक ताकत है इसे मत भूलिये यहॉ किसी कि नहीं चलती यहॉ सूट तक की बात छोडिये पैंट के अन्दर का भी आंकड़ा प्रकाशित किया जाता है। 

लेखक 
प्रवीन यादव "यश "
कापीराईट के अधीन

Thursday, 7 May 2015

ई-गवर्नेंस वाले गांव में ई-अनपढ़ मुखिया, तो..सरकार यहाँ है बदलाव की जरुरत है।

फोटों AU देहरादून से साभार
वाराणसी।देश के विकास में गांवों का बहुत बड़ा योगदान और समर्थन रहता है गांवों से देश की राजनीती तय होती है और यही लगभग 60 प्रतिशत आबादी  देश के मुखिया को तय करती है और गांव -गांव में अपना मुखिया भी चुनती है।
लेकिन सत्ता या ऊँचे ओहदे पर पहुचने के बाद इनके द्वारा चुने गए लोग ही इनको नकारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।सुविधाओं के लिए आने वाले पैसे को जनता से ज्यादा अपना पैसा समझकर हजम कर जाते हैं प्रधानजी। हालाँकि माँ बाप का हर बेटा नालायक नहीं होता लेकिन इस समय नालायकों की संख्या भी कम नहीं है।
आने वाले कुछ महीनो में उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम प्रधान का चुनाव होने वाला है जनता द्वारा गांव का मुखिया चुने गए लोग पिछले चार वर्ष तक अपना पेट भरने में ही काफी समय बर्बाद कर दिए और अब जब सर पर चुनाव का नशा सवार हुआ तो ग्रामीणों का पेट भरने निकल रहे हैं अपना वोट बैंक सेट करने में लग गए है कल बल और छल का पूरा प्रयोग कर रहे हैं। ये मुखिया अपना वोट बनाने के लिए ग्रामीणों के उपयोग हेतु रास्ते बनवाने से लेकर नास्ते तक का इंतजाम खुद कर रहे हैं। इसी में फंस जाते हैं ये भोले भाले लोग और पांच साल तक दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ गांवों में महिला का सीट आरक्षित है वहाँ से महिला प्रधान हैं लेकिन महिला बस नाम की मुखिया है काम तो प्रधानजी अर्थात प्रधानपति ही करते हैं।
जैसा की हम सब जानते हैं गांवों से ही देश की राजनीती तय होती है और यहीँ यदि दीमक लग रहा है तो यह पुरे देश को खोखला बना देगा। आयोग को इसपर विचार करना होगा और कुछ संसोधन भी करने होंगे क्योंकि समय रहते यदि बदलाव नहीं किया गया तो इस डिजिटल और ई गवर्नेंस के जवाने में जनता अपने आप को ठगा महसूस करेगी।
देश के प्रधानमंत्री देश के गावों को डिजिटल रूप देने के लिए तमाम योजनाएं चला रहे है और प्रदेश सरकार भी काफी सराहनीय कार्य कर रही है लेकिन क्या फायदा जब गांव का मुखिया ही अंगूठा छाप रहेगा जिसे मोबाइल तक चलाने की जानकारी नहीं रहेगी और जिसके लेटर पैड पर उसके नाम का हस्ताक्षर कोई और बनाएगा।

बदलाव को जनता स्वीकार रही है लेकिन यहाँ यक्ष प्रश्न यह है कि क्या प्रधान को उपरोक्त जानकारियां नहीं होनी चाहिये? 
यदि पढ़े लिखे और शिक्षित प्रधान रहेंगे तो ये गांव को तरक्की के लिए मजबूत रास्ता तैयार करेंगे और प्रधान से लगायात प्रधानमंत्री तक को चुनने में इन गांवों के लोगों का मताधिकार भी गलत नहीं जायेगा। 
ई गवर्नेंस की अच्छी शुरुआत यह साबित कर रही है की आने वाले समय में बची कूची सुविधाए भी ऑनलाइन हो जाएंगी और ग्रामीणों को इस प्रणाली से काफी लाभ मिल रहा है तो क्यों न गांव का प्रधान भी डिजिटल हो और देश के विकास में अपनी भागीदारी दर्ज कराये। यदि बदलाव किये बगैर चुनाव करा दिया  जायेगा तो फिर कोई विकास नहीं हो सकता और ना ही जनता इस डिजिटल युग को समझ पायेगी। खेती से लेकर खाता तक सभी सुविधाओं की जानकारी ऑनलाइन है तो फिर कलम न चला पाने वाला मुखिया कीबोर्ड कैसे चलाएगा कैसे सही और गलत की जानकारी ग्रामीणों को मिलेंगी।

Saturday, 2 May 2015

भूत प्रेत के चक्कर में दिन रात रटवाया 'हूजूर मैं हीरालाल'

दरवाजे पर लगा टीका,               यही हैं हीरालाल,                     घर पर  एकत्र पड़ोसी।
वाराणसी। 21 सदी में जहॉ मानव देश विदेश के बारे में तत्काल जानकारियॉ प्राप्त कर रहा है तथा तमाम प्रकार की कूरितियों पर लगाम लगा रहा है वहीं कुछ लोगों और जगहों पर अंधविश्वास आज भी हावी नजर आता है ऐसा ही हाल देखने को मिला वाराणसी के फूलपुर थानान्तर्गत थाने गॉव में। गॉव का 55 वर्षीय हीरालाल मौर्या के मन में भूत प्रेत की बातें इस प्रकार घर बनाया ली कि वह अपने परिवार के लोगों को भी नहीं बक्सा और दो दिन तक अपने नाम अर्थात 'हूजूर मैं हीरालाल' का जाप करवाया और लोगों को खाने पीने
तक नहीं दिया फिलहाल बाद में इसकि सूचना ग्राम प्रधान को हुई वे पुलिस को सूचित किये और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिवार वाले अभी भी डरे और सहमें हैं।

डर के मारे भूखे प्यासे लोग रटते रहे 'हूजूर मैं हीरालाल'।

पत्नी रजपत्ति देवी ने बताया कि दो बेटों में छोटा बेटा विवेक कानपुर में अपने परिवार के साथ रहता है और बिस्किट फैक्ट्री में काम करता है तथा बड़ा बेटा विनय मौर्या घरपर ही रहकर त्रिलोचन स्थित एक बिस्किट फैक्ट्री में काम करता है। उन्होने पति के बारे में बताया कि उनकी हालत चार दिन पहले खराब हो गयी और जिसके चलते वे बड़े बेटे विनय व उसकि पत्नी तथा ​तीन बच्चों को गुरूवार की रात में कमरे में बन्द कर दिया और उनसे एक ही रट लगवाने लगा 'हूजूर मैं हीरालाल' ऐसा न बोलने या विरोध करने पर हीरालाल परिजनों को मारने पीटने लगते। 

परिजनों ने 25 वर्ष की बेटी पर भी भूत प्रेत का साया बताया।
उनके घर में उनकी बेटी सुषमा का भी वही हाल है उसकि मॉ ने बताया कि कुछ माह पहले वह गॉव में घूम रही थी उसी दौरान से उसके उपर ब्रम्ह देवी की सवारी हो गयी है जिसके चलते वह हमेशा परेशान रहती है और परिजन भी परेशान रहते हैं उन्होंने यह भी बताया कि बेटी का कई जगह इलाज करवाया लेकिन ठीक न हो पाने के कारण उसका झाड़ फूॅक करवाया जा रहा है जिसके चलते उसके हालत में कुछ सुधार आयी है। 

हीरालाल अपने पोते को ही पीटकर कर दिया अधमरा। 

पड़ोसियों ने बताया कि घर में बंद कर अपने नाम का जाप करवाने के दौरान जाप करने का विरोध करने पर हीरालाल ने अपने पोते आनंद को मारपीट कर घायल कर दिया जिससे उसकि हालत नाजुक बनी हुयी है फिलहाल बड़ी बहू अपने बेटे को लेकर अपने मायके मड़ियाहूॅ जौनपुर चली गयी है जहॉ उसका इलाज चल रहा है।

डाक्टर ने बताया यह मानसिक रोग से ग्रस्त  है 

इधर जब हीरालाल को पिण्डरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लाया गया तो वहॉ के प्रभारी चिकित्सक हरिशंकर मौर्या ने उसे मानसिक रोग से ग्रस्त बताया और उसको दवा देने के साथ ही तत्काल पं0 दीन दयाल राजकीय अस्पताल के लिये रेफर कर दिये।

Friday, 1 May 2015

तो यूपी पुलिस की एैसी—तैसी कर दे रहे हैं सपा के सपूत।

अधिकारियों को आपबीती सुनाते थानाध्यक्ष व सिपाही।
वाराणसी। राजनेताओं से लेकर जनता तक की रक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है लेकिन सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेता पुलिस को अपना नौकर समझ रहे हैं और उसे जब चाहें तब कठपुतली की तरह नाच नचाना चाहते हैं जहॉ पार्टी के मुखिया द्वारा इन छुटभइया नेताओं को समय समय पर चेतावनी दी जाती है कि कोई भी गलत काम न करें और न ही पार्टी की छवि खराब करें लेकिन यही हाल रहा तो पार्टी की छवि मटियामेट करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कुछ नेता। 

पिछले दिन वाराणसी जनपद के एक दरोगा को पार्टी महानगर अध्यक्ष ने जीभ काट लेने  की धमकी फोन से देते हुए सुने गये थे और उसके बाद वह रिकार्डिग सोशल मिडिया पर खूब वायरल हुई। फर्रूखाबाद में सपा के मुखिया मुलायम सिंह के कार्यक्रम के बाद पुलिस लाईन में अन्दर जाने से रोकने के बाबत जहानगंज थानाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार मिश्रा, दरोगा मनोज कुमार, हरिओम त्रिपाठी व सिपाही मुकुल कुमार को सपा के जिलाध्यक्ष सहित कुछ लोगों ने पीट दिया तथा रोड पर ही धरने पर बैठ गये तथा पुलिस प्रशासन के खिलाप नारेबाजी करने लगे बाद में डीएम एनकेएस चौहान व एसपी विजय यादव से जिलाध्यक्ष, सतीश दीक्षित दर्जा प्राप्त पूर्व मंत्री सहित अन्य छूटभैये नेताओं ने थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाप ठोस कार्यवाही करने की शिकायत किये उच्चाधिकारियों द्वारा पुलिस कार्यवाही का आश्वासन देने पर लोग शान्त हुए। फिर जब अधिकारी गण पुलिसर्मियों से इस बाबत जानकारी लिये तो वे अधिकारियों के सामने रो पड़े वाह रे नेता तेरी नेतागिरी की धौंस से वर्दीधारी रो दिये।  यह काफी शर्म का विषय है।

क्यों यह सत्ताधारी लोग सत्ता के नशे में चूर हैं? 

यदि इसी प्रकार से सत्ता पक्ष के लोग पुलिस को अपना नौकर समझते रहे तो आने वाले समय में पुलिस की कार्य करने की प्रवृत्ति बदल जायेगी। पुलिस के लोग नेताओं से डरकर काम करना प्रारम्भ कर देंगे। इस बारे में विचार करने की जरूरत है।

Tuesday, 28 April 2015

चार पत्रकार साथियों की मौत, बहुतों को खबर नहीं

कल आगरा में यमुना एक्सप्रेस वे पर सड़क हादसे में दिब्यान्शु, मनोज कुमार, नकुल शुक्ला, उमेश कुमार सिंह आदि चार पत्रकरों की मौत हो गई ।भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
क्या सत्ता के पास उनके परिवार के लिए भी कुछ है या फिर चमचागिरी करने वाले कुछ लोगों को ही पुरस्कारों से नवाजना याद रहता है?

न चैनल साथ है न अख़बार साथ है
और न ही सत्तालोभी सरकार साथ है।
मर गए कलमवीर कहीं आँशु नहीं दिखा
"यश" कैसे कहे सभी पत्रकार साथ हैं।।

by:- प्रवीन यादव"यश" वाराणसी
9450112497
pravinyadav789.blogspot.in

Monday, 27 April 2015

भूकंप की विनाशलीला देखे हुए 86 लोग पहुचे वाराणसी एअरपोर्ट, डरे सहमे दिखाई दिए।

नेपाल से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुचा कमलेश अग्रवाल का परिवार।
वाराणसी। सोमवार को लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट बाबतपुर पर शायंकाल 5:10 बजे एयर इण्डिया का स्पेशल विमान काठमांडू से 86 यात्रियों को लेकर वाराणसी पहुचा। ज्यादातर यात्री एयर इण्डिया के विमान एआई 405 से दिल्ली के लिए रवाना हो गए जबकि कुछ यात्री वाराणसी सहित अन्य जगहों पर वाहनों से अपने गन्तब्य को रवाना हुए।
लोग बताये भूकंप ने कुछ नहीं छोड़ा।
नेपाल काठमांडू से वाराणसी पहुचे लोगों ने बताया कि वहां कुछ नहीं बचा सबकुछ तबाह हो गया है। रह रह कर आ रहे भूकंप के झटकों से लोग अभी भी खौफ में जी रहे  हैं रहने से लेकर खाने पीने के सामानों के लिए भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
काठमांडू का परिवार भूकंप रोकने के लिए बाबा विश्वनाथ से करेगा प्रार्थना।
काठमांडू के भगतुपुरी से वाराणसी पहुचे कमलेश अग्रवाल ने बताया की वहां भूकंप ने कई जनपदों में भारी तबाही मचाया है कही कही लगभग अस्सी फीसदी घर गिर गए हैं। वहाँ पर भूकंप का आना अभी नहीं थम रहा है। वाराणसी सपरिवार पहुचे कमलेश ने कहा कि सुना है बाबा विश्वनाथ पुरे विश्व के नाथ हैं मैं यहाँ उनसे भूकंप को रोकने के लिए प्रार्थना करने आया हूँ।
विदेशी पर्यटक भी थे डरे और सहमे।
जर्मनी के फ्रेंस और योगन, ऑस्ट्रिया के क्लारा सहित अन्य विदेशी पर्यटकों ने बताया कि हमलोग भारत आने के बाद काफी खुश हैं नेपाल में एक एक पल खतरों में गुजर रहा था जब भी धरती डोलती रूह कांप जाती थी। हम भारत के प्रधानमंत्री और भारतवासियों का बहुत आभार ब्यक्त करते हैं। वहां पर भारत के नागरिक काफी मदद कर रहे हैं।
तो अभी हजारों लोग दबे है।
काठमांडू निवासी कमलेश अग्रवाल ने बताया कि मरने वालों की संख्या पांच हजार से ऊपर ही है कुछ गांवों में अभी भी कई मकानों में सैकड़ों लोग दबे पड़े हैं उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को गांवों में भी सुविधा मुहैया करानी चाहिये तथा बंद रास्तों को भी खुलवाना चाहिए क्योंकि रास्ता खुलने से कम से कम लोग भागकर जान तो बचा सकते हैं।

Saturday, 25 April 2015

तो धरती से ज्यादा सोशल मीडिया पर था भूकंप का असर क्योंकि रेडियों व टेलीविजन बस "मन की बात" के लिए हैं।

वाराणसी। शनिवार को दोपहर में दो बार आये भूकंप से भयभीत लोग जब अपने परिचितों का हाल खबर लेने का प्रयास किये तो मोबाइल का नेटवर्क काम करना बंद कर दिया था और दो तीन बार बीप के बाद फोन डिसकनेक्ट हो जा रहा था। इस कठिन घडी में व्हाट्स एप ही एकमात्र सहारा बनकर सामने आया लेकिन हालचाल मिलने के साथ ही यह एप लोगों को खूब डराया भी। कारण केवल इतना था कि मौसम विभाग द्वारा तत्काल कोई उपडेट नहीं मिल पा रहा था और व्हाट्स एप पर अपने आप को ज्योतिषी समझने वाले फटाफट अपने ज्योतिष विद्या का प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिए कि फिर आएगा भूकंप और मचायेगा बड़ी तबाही।

कॉपी पेस्ट करने वाले गिरोह रहे सक्रिय।
जब व्हाट्स एप पर ज्योतिषी बनने वाले लोग अपनी विद्या को इस खुले मंच पर चिपका दे रहे थे तो तुरंत आदती मजबूर कॉपी पेस्ट करने वाले कई ग्रुप में धड़ाधड़ चिपकाकर " नंबर वन समाचारपत्रों की तरह मैं बड़का हूँ, नहीं मैं बड़का हूँ"( जो पिछले दिनों लखनऊ में हुआ था) वाली तर्ज पर लग जाते थे और कई ग्रुप में अपने आप को अंतर राष्ट्रीय महसूस करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे थे हालाँकि बहुत से लोग भूकंप से बचाव सहित अन्य अच्छी जानकारियां और महत्वपूर्ण खबरें पोस्ट कर रहे थे।

एक महोदय बोले हैं कि ख़ुफ़िया तंत्र करेगा जाँच।
जिस तरह से व्हाट्स एप के माध्यम से अफवाहों को लोगों के बिच में परोसा जा रहा था उससे काफी लोग भयभीत हो गए थे पुरे दिन काम धंधा छोड़कर परिवार सहित घर से बाहर निकलकर  भूकंप आने का इंतज़ार कर रहे थे तथा शायंकाल ये समझे की मुर्गी की जगह अंडा भी उड़ाया जा रहा है तो खूब कोसे पेस्टियाने वालों को। हालाँकि शायं काल एक मित्र ने व्हाट्स एप पर शेयर किया कि अफवाह फ़ैलाने वालों की जाँच चल रही है इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन बहुत से ऐसे परिवार जिनकी आज रात की नींद गायब है।

अब रेडियो और सरकारी चैनल मन की बात तक ही सिमित हैं।

यहाँ बड़ा सवाल यह उठता है की क्या सरकार को सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से सही जानकारी नहीं डालना चाहिए था और यदि सरकार द्वारा ही दो से तीन बजे के समय तेज भूकंप आने का संदेश दिया गया था फिर क्यों नहीं आया?
और बाद में मौसम विभाग ने जो तमाम जानकारी दिया क्या वह पहले नहीं पता किया जा सकता था।
मुझे लगता है कि अब ये रेडियो और टेलीविजन के सरकारी चैनल अब केवल "मन की बात" करने तक ही सिमित हो गए हैं।जनता भले ही अफवाहों से मर जाये लेकिन हम करेंगे तो बस "मन की बात" । कल यानि 26 अप्रैल को 11 बजे से "मन की बात" होगी सुनना और देखना मत भूलियेगा।

हिलने लगी धरती और कांपने लगा जिगर।

बाबतपुर के न्यू टर्मिनल भवन के विजिटर एरिया में लटक गया फाल सेलिंग
वाराणसी।दोपहर में आये भूकंप ने वाराणसी के लोगों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। हर कोई अवाक था की क्या हो रहा है। जनपद के हरहुआ,पिण्डरा, बड़ागाँव, अराजी लाइन, सेवापुरी, चोलापुर,चिरईगांव,काशी विद्यापीठ आदि सभी विकास खंड व शहर में भूकंप ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। सभी लोग अपने परिवार सहित घरों से बाहर निकल गए। सेलिंग फैन सहित घर में रखे अन्य सामान अपने आप हिलने और गिरने लगे। एकाएक आये झटके से सभी लोग स्तब्ध थे।
इधर लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट पर भी महसूस हुआ भूकंप का झटका।
लाल बहादुर शास्त्री एअरपोर्ट पर भी महसूस किये गए भूकंप के झटके। इस दौरान नए टर्मिनल भवन में मौजूद अधिकारी, यात्री व एअरपोर्ट के कर्मचारी नए टर्मिनल भवन से बाहर भाग गए।
लोगों ने बताया की दोपहर 11:45 पर धरती हिलने लगी लोग कुछ समझ पाते तब तक एअरपोर्ट की विजिटर एरिया की फाल सेलिंग टूटकर गिरने लगी लोग तत्काल टर्मिनल भवन से बाहर भाग गए।
सेलिंग में लगे खम्भे में भी आई दरार।
भूकंप के कारण एअरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के फाल सेलिंग की मजबूती के लिए लगाये गए खंभों के बिच में भी दरार आ गई। अभी भी फाल सेलिंग के लटके हुए कुछ टुकड़े भूकंप की गवाही दे रहे हैं।

दो बार हिली धरती लोगों को आने लगा चक्कर।
एक बार आये भूकंप की चर्चा चल ही रही थी तभी लगभग 12:16 पर दूसरी बार आये भूकंप से लोग पूरी तरह भयभीत हो गए। कुछ यात्रियों ने बताया की दो बार भूकंप आने के बाद उनको चक्कर आने लगा।

मोबाइल सेवाएं पूरी तरह रही बाधित।
भूकंप आने के बाद सभी मोबाइल कम्पनियों की सेवाएं पूरी तरह से ठप  हो गई लोग परिचितों को यदि फोन कर संपर्क करना चाहते थे तो फोन कट जाता था। जिससे लोगों को बहुत समस्याएं आई।

सीआईएसएफ के जवानों ने संभाला मोर्चा।
भूकंप का झटका जैसे ही एअरपोर्ट के सुरक्षा प्रभारी एसके झा  को महसूस हुआ वे तत्काल जवानों के माध्यम से यात्रियों को टर्मिनल भवन से बाहर निकलवाए और यात्रियों को सुरक्षा के लिए डटे रहे।

तो रविवार को एयर इण्डिया की काठमांडू जाने विमान हो सकती है निरस्त।
ज्ञात हो की वाराणसी से काठमांडू के लिए सप्ताह में चार दिन जाने वाली विमान का रविवार को काठमांडू जाना रद्द हो सकता है। फ़िलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टी नहीं है।

Friday, 24 April 2015

सेवानिवृत्त चपरासी से एक लाख सत्तर हजार की ठगी।

जाँच करती पुलिस और रामफेल पटेल 
वाराणसी। बड़गॉव थानान्तर्गत बीरापट्टी गॉव निवासी सेवानिवृत्त चपरासी से शुक्रवार को सुबह 10:30 पर एक लाख सत्तर हजार की ठगी करने के बाद ठग आसानी से फरार हो गये उसके बाद पीडित ने 100 नम्बर डायल कर पुलिस से लूट का मामला बता दिया पुलिस मौके पर पहुची तो मामला ठगी का निकला।

रामफल पटेल इण्टर कालेज बीरापट्टी के सेवानिवृत्त चपरासी हैं। उन्होनें बताया कि गुरूवार को ये खेत में काम कर रहे थे उसी दौरान मोटरसाईकिल से एक आदमी आया और इनके खेत को समतल करने की बात करने लगा तथा इनका खेत देखने के बाद इनका नाम पता नोट करके चला गया और शुक्रवार को सुबह दूसरा आदमी मोटरसाईकिल से इनके घर आया उसके साथ मे कुछ मजदूर भी थे। वह इनसे पूछा कि आपने खेत समतल करवाने के लिये नाम दर्ज कराया है हम सरकारी मशीन लाकर खेत समतल करेंगे पूरे छ: लाख रूपये लगेंगे जिसपर वे खेत समतल करने से मना कर दिये तो उक्त व्यक्ति ने उन्हें बताया कि आपको इसके लिये सजा हो सकती है यदि आप खेत समतल करवाना चाहते हैं तो मुझे एक लाख सत्तर हजार रूपया दे दीजिए मैं अधिकारियों से बात करके इतने में ही काम करवा दूॅगा रामफल तैयार हो गये और अपने बेटे मुन्ना पटेल के साथ बीरापट्टी स्थित यूबीआई बैंक गये और एक लाख सत्तर हजार रूपया निकाल कर दे दिये वह बोला की अभी मजदूर काम कर रहे हैं थोड़ी देर में मशीन आपके खेत में चली जायेगी और वह आदमी रूपया लेकर फरार हो गया इधर जब रामफल ने पूरी बात अपने बेटे मुन्ना से बताई वह भागे दौड़े खेत मेंं पहुचा तो देखा मजदूर भी गायब थे उसने तत्काल पुलिस को सूचना दिया कि एक लाख सत्तर हजार की लूट हो गयी है मौके पर सीओ बड़ागॉव व थानाध्यक्ष पहुचे और पूरे मामले की जानकारी लिये। इस बारे में थानाध्यक्ष बड़गॉव से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि दो अज्ञात लोगों के खिलाप धारा 419 व 420 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ​तलाश जारी है। 
प्रवीन यादव यश के एफबी वाल से 

Thursday, 23 April 2015

एक तरफ किसी की जान जाती रही और दूसरी तरफ पत्रकारों का कैमरा चलता रहा।

आम आदमी पार्टी की जंतर मंतर पर हो रही रैली में राजस्थान के किसान गजेन्द्र सिंह की मौत ने राजनेताओं व दिल्ली पुलिस के साथ साथ मीडिया की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। जब आप की रैली चल रही थी उस दौरान गजेन्द्र सिंह नीम के पेड़ पर चढे और चढ़ते दौरान वे मीडिया वालों से हाथ हिलाकर फोटों भी खिचवाये और इस दौरान फ़ोटो भी मीडिया कर्मियों ने बनाई है जो अखबारों और चैनलों पर दिखाया है। तो इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि गजेन्द्र सिंह मीडिया के नज़रों के सामने फाँसी पर लटक गए। जब गजेन्द्र सिंह पेड़ पर चढ़ने के बाद अपने गमछे से फंदा बनाये होंगे तो क्या मीडिया कर्मियों की निगाह उनके उपर नहीं गई होगी और यदि गई तो क्या चौथे स्तम्भ के लोग अपनी वाह वाही लूटने के लिए गजेन्द्र को मरते देख रहे थे और उनके मरने का इंतजार किये। और कुछ देर बाद जब गजेन्द्र सिंह की मौत हो जाती है तो ये खबर चलाने लगते हैं तथा आम आदमी पार्टी के नेताओं और दिल्ली पुलिस को सवालों के कटघरे में खड़े करके सवाल करना प्रारम्भ कर देते हैं।
यहाँ यह सवाल भी लाजमी है की क्या मीडिया के वे लोग दोषी नहीं हैं जो गजेन्द्र की फ़ोटो और विजुअल बनाते रहे और गजेन्द्र मर गए तो खबरों के कवरेज के लिए वाहवाही लूटने लगे?
क्या मीडिया के लोग उनको बचा नहीं सकते थे? 
यह सब लिखने के पीछे केवल यही कारण है की आज के समय में लोगों का विश्वास नेताओं और पुलिस वालों पर से उठ चूका है लेकिन चौथे स्तम्भ को आज भी लोग सही मानते हैं क्योंकि जब भी किसी जनसाधारण आदमी के समस्याओं का समाधान ये सफ़ेदपोस और खांकी वर्दी वाले नहीं करते हैं तो ये चौथा स्तम्भ ही विकल्प होता है। ये न्याय का आसरा मन में लेकर मीडिया के सामने अपने आँशु बहा लेते है और अपना दुःख दर्द बाँट लेते है। लेकिन जहाँ तक मेरा मानना है यदि चौथा स्तम्भ थोडा सा प्रयास किया होता तो गजेन्द्र सिंह की जान बच गई होती।
फ़िलहाल घटना के पीछे जो भी कारण हो वह तो जाँच होने के बाद ही आएगा लेकिन ये राजनेता टीवी पर दो चार दिन तक खुब तू चोर मैं सिपाही वाला खेल खेलते नजर आयेंगे। 
वाराणसी से प्रवीन यादव "यश" का ईस्वर से यही कामना है की उनके परिवार वालों को यह दुखद पल सहने की क्षमता प्रदान करें।
नोट:— यह लेख लिखने के पीछे किसी को आहत करना मेरी सोच नहीं है लेकिन क्या मानवता मर गयी थी दिल्ली में जंतर मंतर पर हो रही रैली के दौरान?

बारात में जा रहे युवकों से जमकर हुई मारपीट।

फोटों गुगल से साभार
वाराणसी। बड़ागॉव थानान्तर्गत औसानपुर गॉव के एक लड़के की शादी जंसा थाना क्षेत्र के दान्दूपुर में तय थी मंगलवार को शायंकाल बारात सजधज कर घर से निकली और जब बाराती दान्दूपुर से कुछ पहले ही भाउपुर बाजार में पहुचे थे तो वहॉ रोड पर चल रही लडकियों पर अश्लील फब्तियॉ कसना प्रारम्भ कर दिये जो बाजार में मौजूद कुछ युवकों को नागवार गुजरी उनके चिल्लाने का सिलसिला कम नहीं हुआ इधर भाउपुर के एक वृ़द्ध व्यक्ति ने जब उन युवकों को मना किया तो वे उससे ही उलझ गये इस बात पर भाउपुर बाजार के कुछ युवक पहुच गये और पीटना प्रारम्भ कर दिये बात लाठी डंडे तक पहुच गयी और स्थानीय युवकों ने लाठी डंडे से बारातियों की जमकर पिटाई की। उसके बाद क्षेत्र के कुछ सामाजिक नागरिकों के बीच बचाव के बाद मामला शान्त हुआ इस दौरान शुभम मौर्या, संतोष शर्मा, मिथलेश मौर्या, रोशन शर्मा, मोनू प्रजापति, अजय मौर्या, गोरस नाथ प्रजापति व पूल्लू यादव सहित दर्जनों बारातियों को चोट आयी। इस बारे में जंसा थानाध्यक्ष से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने ऐसे किसी घटना से साफ इन्कार कर दिया। 
रिपोर्ट:— शुभम मौर्या

Tuesday, 21 April 2015

ट्वीटर से किसानों को दिया जा रहा है आश्वासन, लेकिन रोज मर रहे हैं किसान।

ट्वीटर से किसानों को दिया जा रहा है आश्वासन, लेकिन रोज मर रहे हैं किसान।
वाराणसी। एक तरफ बारिस में किसानों की पूरी फसल चौपट हो गयी है फसलों की हालत देखकर किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जा रहे हैं अखबारों व टीवी चैनलों के माध्यम से प्रतिदिन यह देखने और पढ़ने को मिलता है कि देश में रोज एक किसान मर रहा है यह आंकड़े हवा हवाई हैं कुछ किसानों के मरने के बाद तो सरकारी अधिकारी उसे पुरानी बीमारी का शिकार बता देते हैं और कहते हैं कि तबीयत वर्षों से खराब चल रही थी जिसके कारण मौत हो गयी लेकिन क्या सरकार यह आंकड़ा या यह मशीन भी रखी है जिससे यह साबित हो सके कि किसान की मौत उसके खेती में हुई क्षति के कारण हुआ है। एक तरफ तमाम प्रकार के दावे प्रदेश व केन्द्र सरकार द्वारा सोशल मिडिया के माध्यम से किया जा रहा है कि किसाना आत्म हत्या न करें लेकिन इन दावे और वादे के बावजूद भी किसान आयेदिन आत्महत्या कर रहे हैं या फिर किसी न किसी कारण से उनकी मौत होते जा रही है। फिलहाल सरकार द्वारा किये गये सभी दावे मौके पर हवा—हवाई साबित हो रहे हैं क्योंकि जमीनी स्तर पर इसकी सच्चाई कुछ और ही बया करती है कोई क्षेत्रीय अधिकारी इसकी जांच  गॉव में पहुचकर नहीं कर रहा है। 

तो कैसे तैयार होगा आंकड़ा व किसानों का नुकसान?
यदि लेखपाल मौके पर गॉवों में पहुचकर आंकड़े तैयार नहीं कर रहे हैं और लापरवाही कर रहे हैं तो किस प्रकार से यह आंकड़ा तैयार किया जायेगा कि किस किसान का कितना क्षति हुआ? इस बारे में वाराणसी हरहुआ ब्लाक के कुछ गॉवों के किसानों से बातचीत किया गया तो लोगों ने बताया कि लेखपाल कौन है मैं नहीं जानता तथा वह गॉव में कभी आते भी नहीं है फिलहाल कुछ लोगों ने यह भी बताया कि लेखपाल आते तो हैं लेकिन गॉव के अपने कुछ चुनिन्दा लोगों के यहॉ आकर आंकड़े तैयार करते हैं और चले जाते हैं। हालांकी कुछ गॉव तो ऐसे भी हैं जहॉ के लोग लेखपाल को जानते तक नहीं हैं और न ही लेखपाल कभी उस गॉव में आते हैं। 


तो महोदय किसानों के आत्महत्या का दौर नहीं थम पायेगा।
किसानों ने जिस प्रकार से बताया कि लेखपाल केवल गॉव के चुनिन्दा लोगों के घर पर ही बैठकर आंकड़े तैयार कर रहे हैं  यदि यह सही है तो उसमें गॉव के कुछ किसान लाभ पाने से वंचित रह जायेंगे और वह मजबूरन आत्म हत्या कर लेंगे और यह दौर थमने का नाम नहीं लेगा। 

बाढ़ में भी हुआ था जमकर घपला। 
आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले जब वाराणसी के वरूणा तटीय क्षेत्रों के किसानों को बाढ़ राहत आपदा के तहत लाभ दिया गया था उस दौरान कुछ ऐसे भी व्यक्ति ​थे जिनके नाम से खेत ही नहीं था उनका भी चेक आया था और कुछ लोगों का खेत नदी के किनार नहीं था उनका भी चेक कुछ लापरवाह अधिकारीयों के कारण आ गया था।
तो इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि बारिस द्वारा मचाई गयी तबाही के दौरान किसानों को लाभ पहुचाने के लिये सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास के सर्वे में घपलेबाजी न हो।  इसे दूर करने के उपाय को तलाशने की जरूरत है। 

Monday, 20 April 2015

क्या आनलाईन फार्म भरवाने के बाद अगली प्रक्रिया भूल गयी सरकार

क्या आनलाईन फार्म भरवाने के बाद अगली प्रक्रिया भूल गयी सरकार?
बात तो चौकाने वाली है लेकिन हॉ यह भी सच है उत्तर प्रदेश सरकार में ऐसा भी हो रहा है अभी पिछले दिनों हुई पुलिस विभाग की भर्ती को लेकर तमाम प्रकार के आरोपों को झेल रही यूपी सरकार जाने क्यों अभ्यर्थियों से सौतेला रवैया अपना रही है। एक वर्ष से ग्राम्य विकास अधिकारी का फार्म भरने के बाद लोग कर रहे हैं इन्तजार। 

एक साल से कर रहे इन्तजार।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अक्टूबर 2013 में ग्राम्य विकास अधिकारी का फार्म आनलाईन भरा जाना प्रारम्भ हुआ समय—समय पर आनलाईन फार्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ती गयी और इस तरह बाद में 18 जनवरी 2014 फार्म के रजिस्ट्रेशन की आखि​री तिथि पर आवेदन की प्रक्रिया रोक दी गयी। जिसमें प्रदेश के 125220 अभ्यर्थियों ने फार्म भरा जिसमें 49316  सामान्य वर्ग, 54957 अन्य पिछड़ा वर्ग, 20250 अनु0 जाति तथा 697 अनु0 जनजाति के लोगों ने का फार्म था। और एक वर्ष गुजर जाने के बाद अभ्यर्थियों को आज तक कोई जानकारी नहीं मिली।वाराणसी के कुल 1988 अभ्यर्थी भी कर रहे हैं इन्तजार।

यह विवरण ग्राम्य विकास विभाग उ0प्र0 की वेबसाईट www.gvaup.in से लिया गया है।


नहीं आयी कोई जानकारी।
ग्राम्य विकास अधिकारी के लिये आनलाईन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रदेश सरकार अभ्यर्थियों के ​जीवन से खिलवाड़ कर रही है आवेदन के समय आवेदन शुल्क भी जमा कर दिया लेकिन आज तक इसका प्रवेश पत्र नहीं आया समय—समय पर जिस प्रकार से इस भर्ती की तिथि बढ़ायी गयी उससे तो यही प्रती​त होता है कि प्रदेश सरकार केवल अभ्यर्थियों के जेब पर कैंची चलाना चाहती थी और सफल हो गयी लोगों ने यहॉ तक कहा कि आयोग की परीक्षा में इतना समय नहीं लगता है लेकिन जो भी परीक्षा प्रदेश सरकार अपने विभागों के माध्यम से करा रही है उसमें जाने क्यों इतना समय लग रहा है तथा मनमाने तरीके से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। 

उत्तर प्रदेश चकबन्दी लेखपाल आनलाईन फार्म 2015

चकबन्दी लेखपाल की भर्ती का फार्म आनलाईन भरा जा रहा है इच्छुक अभ्यर्थी 18.05.2015 से पहले रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं आवेदन करने बाद आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 20.05.2015 है व फाइनल फार्म भरने की अंतिम तिथि 22.05.2015 है अन्य जानकारी के लिये यहॉ क्लिक करें

Sunday, 19 April 2015

वाह रे गरीब रथ उर्फ "मैजिक मूवमेंट" तुम बहुत सता रही हो....

सबसे पहले ...आज आपका यश दूसरी बार वाराणसी से दिल्ली जा रहा है साथ में है बड़े भाई गजेन्द्र सिंह "गज्जी" और वाराणसी के युवा कलमवीर मेरे करीबी मित्र अमन सिंह।

गरीब रथ में भोजन करते गजेन्द्र सिंंह।
दोनों भाइयों ने ट्रेन टिकट की जिम्मेदारी मेरे ऊपर छोड़ दी और मैं भी गरीब रथ को "मैजिक मूवमेंन्ट" समझ बैठा और वाराणसी टू दिल्ली की यात्रा "मैजिक मूमेंट ट्रेन गरीब रथ से ही करने का निश्चय किया और 3 एसी का तीन टिकट कटा लिया पहला ज़ी.के. और दूसरा ए. के. और तीसरा पी.के. नाम से तीन टिकट बड़े मजे की बात यह है कि जी.के.ए.के.पी.के. तीन लोगों को साथ में यात्रा करना है। हालाँकि यात्रा के प्रारम्भ में कुछ मित्र पूछे किस ट्रेन से जा रहे हैं तो मेरा जवाब होता "मैजिक मूवमेन्ट" ट्रेन से लोग आश्चर्य चकित हो जाते की ये कौन सी नई ट्रेन है मैं बताया की लालू जी के समय में जिस ट्रेन ने खूब जादूगरी की थी उसका ही नाम है मैजिक मूवमेंट, लोग खुश मैं भी खुश।
यात्रा प्रारम्भ हुई इस मैजिक मूवमेंट ने तो कमाल कर दिया ट्रेन में बोगी के किनारे वाली ऊपरी सीट पर मैं गया और लेट गया प्यास लगी तो ऊपर उठते ही धड़ाम से सिर लड़ गया ऊपर काफी परेशान था मैं। तब बड़े भाइयों ने कहा यह गरीब रथ है सबकुछ वही है बस 3 ए सी है। मेरा माथा चकरा गया कि वाह रे गरीब रथ तुम फिर मैजिक कर गई बड़ी कष्ट है जी दिल्ली पहुचने से पहले तुमको बहुत गरियाऊंगा ..............
आगे यात्रा जारी है 
By:-आपका प्रवीन यादव "यश"

Tuesday, 24 February 2015

आपसी प्यार -तभी विवाह सफल

साभार:— शालिनी कौशिक
[कौशल ]  
बैंड बाजे आजकल बहुत जोर-शोर से बज रहे हैं  ,चारों ओर बहुत पहले से ही शादी ब्याह के इस मुहूर्त की शोभा होने लगती है ,चहल-पहल बढ़ने लगती है ओर इससे भी बहुत पहले होने लगता है लड़के वालों के घर का नव-निर्माण बिलकुल ऐसे ही जैसे कि उन्हें वास्तव में इसी दिन की तलाश थी कि कब हमारे घर की लक्ष्मी आये औऱ हमारे घर की शोभा बढे .
आरम्भ में तो ऐसा ही लगता है कि लड़के वाले बहु के आगमन की तैयारियां यही सब सोच कर करते हैं और जिस घर में रह रहे होते हैं चैन से आराम से ,सुकून से ,जिसमे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती बल्कि एक ऐसा घर होता है वह उनके लिए जो कि आस-पास के सभी घरों से हर मायने में बेहतर होता है और तो और ऐसा कि उसके सामने अन्य कोई घर कबाड़े के अलावा कुछ नहीं होता किन्तु लड़के की शादी तय होते ही लड़के वाले उस घर में नए नए परिवर्तन करने लगते हैं न केवल रंगाई -पुताई अपितु फर्श से लेकर दीवार तक खिड़की से लेकर घर की चौखट तक वे पलट डालते हैं ,लगता था कि वास्तव में कितना उत्साह होता है  बहू लाने का ,किन्तु जब असलियत मालूम हुई तो पैरों तले जमीन ही खिसक गयी क्योंकि ये उत्साह यहाँ लड़के को तो जीवनसाथी पाने का तो होता ही है उससे भी कहीं ज्यादा उसे और उसके परिजनों को होता है एक ऐसे दहेज़ का जिसके लिए वे बचपन से लेकर आज तक अपने लड़के को पढ़ाते आये थे ,उसकी ज़रूरतों को पूरा करते आये थे ,कुल मिलाकर उनका निवेश अब चार गुना होकर मिलने का समय आ जाता है और यही कारण है लड़के वालों का घर में बहुत से नव-परिवर्तन कराने का ,जिनके लिए सारा धन वे लड़की वालों से लेने वाले हैं .आज लोगों ने इस सम्बन्ध को इतना निम्न स्तर प्रदान कर दिया है कि कहीं भी शादी -ब्याह के सुअवसर पर दोनों पक्ष के लोगों में मेल-मिलाप की ख़ुशी नहीं दिखाई देती अपितु दिखाई देता है कोरा आडम्बर और एक दूसरे को पैसे में नीचा दिखाने की भावना जिसने इस सुन्दर अवसर को निकृष्ट स्वरुप प्रदान कर दिया है .कौन समझाए कि ये अवसर दो लोगों के ही मेल-मिलाप का नहीं अपितु दो परिवारों दो संस्कृतियों के मेल का अवसर है और लड़का हो या लड़की दोनों के लिए एक नव जीवन की शुरुआत है जिसमे उन्हें सभी का प्यार व् सहयोग आवश्यक है न कि दिखावा और नीच-ऊंच की भावना .अगर इस सम्बन्ध को एक मीठा एहसास देना है तो इसमें प्यार भरें ,विश्वास भरें न कि पैसे और कुटिलता फिर देखिये ये मधुरता की मिसाल अवश्य कायम करेगा .