Sunday, 18 September 2016

सफाई विभाग के सुपरवाइजर से हुई मारपीट

बाबतपुर : शनिवार को देर शाम लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुरानी बिल्डिंग में सफाई का कार्य की देखरेख करने वाले सुपरवाइजर को अज्ञात लोगों ने मारपीट कर घायल कर दिया।
जानकारी के अनुसार पुरानी बिल्डिंग में सफाई की देख रेख करने वाला सुपरवाइजर राजीव सक्सेना रात्रि 8:00 बजे हवाई अड्डे से अपने कमरे की तरफ निकल रहा था कि जब वह पार्किंग में पहुंचा था उसी समय पीछे से आए अज्ञात लोग उसे मारने पीटने लगे वह कुछ समझ पाता तबतक लोग उसे बुरी तरह पीट दिए। वह नई बिल्डिंग में भाग कर अपनी जान बचाया और अधिकारियों से पूरी बात बताया। हवाई अड्डे के अधिकारी मामले की जांच पड़ताल में जुटे हैं।

बताते चलें की यह वही सुपरवाइजर है जिसके ऊपर सफाई करने वाली एक महिला ने 2 सप्ताह पहले दुराचार के प्रयास का आरोप लगाया था।

Friday, 16 September 2016

बीयर शॉप के सैल्समैन को असलहा सटाकर लूट

वाराणसी: बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरहुआ चौराहे पर स्थित बीयर की दुकान को बंद करते समय पहुंचे बदमाशों ने सेल्समैन को असलहा सटाकर बिक्री के बीस हजार और सेल्समैन के पास रखे चार हजार तथा मोबाईल लूट लिए और सेल्समैन को दुकान में ही बंद कर भाग गये।
जानकारी अनुसार सकलडीहा का अतुल हरहुआ चौराहे पर स्थित बीयर की दुकान पर सेल्समैन है उसने बताया कि गुरुवार को रात्रि सवा 10 बजे वह दुकान बंद करने जा रहा था उसी दौरान दो युवक आये और उससे बीयर मांगे जैसे ही वह फ्रिजर में से बीयर निकालने के लिए लटका उसी दौरान बीयर मांगने वाला युवक असलहा लेकर केबिन में घुसा और उसकी कनपटी पर सटा दिया युवक जबतक कुछ सोच पाता तबतक तीन लड़के और आ गए तथा कैश बॉक्स में से बिक्री के बीस हजार रूपये निकाल लिए साथ ही सेल्समैन की मोबाईल और जेब में रखे चार हजार रुपये भी निकालने के साथ ही सीसीटीवी कैमरा उखाड़ कर साथ ले गये और टीवी तोड़ दिए तथा सेल्समैन को दुकान में ही बंद कर सभी भाग गए उसके बाद जब सैल्समैन ने शोर मचाया तो पड़ोस के लोग पहुचकर शटर उठाये तो उसने आपबीती बताया और 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दिया। सूचना देने के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुची और जाँच पड़ताल में जुट गयी।

एसपीआरए भी पहुचे
घटना की जानकारी मिलते ग्रामीण पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी भी घटनास्थल पहुंचे और सेल्समैन तथा वहां मौजूद सिपाहियों से पूछताछ किये तथा पुलिस द्वारा सक्रियता न बरतें जाने के चलते जमकर फटकार लगाये।

भुक्तभोगी सेल्समैन अतुल जायसवाल

हवाईअड्डे से शहर तक जल्द ही चल सकते हैं ऑटो

एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में हुई चर्चा

वाराणसी : लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के मुख्य टर्मिनल भवन के सीआईपी लाउंज में गुरुवार दोपहर में आयोजित एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में रनवे तथा हवाईअड्डे के विस्तारीकरण, सौंदर्यीकरण, मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र, जौनपुर सहित आसपास के अन्य जनपदों के पर्यटन स्थलों की जानकारी हेतु डिस्प्ले बोर्ड, सहित यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा किया गया।

जानकारी अनुसार लाल बहादुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आयोजित एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में रनवे बढ़ाने को लेकर होने वाली समस्यायों जैसे रनवे के पश्चिमी छोर की तरफ जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग 56 है वहीं पूर्वी छोर पर रेलवे लाइन है जिसके चलते पूरब की तरफ रनवे नहीं बढ़ाया जा सकता है। पश्चिम की तरफ ही रनवे को बढ़ाये जाने पर विचार किया गया जिसमें जिला प्रशासन द्वारा यह आश्वासन दिया गया कि जल्द ही बैठक कर भूमि उपलब्ध करायी जायेगी जिससे रनवे का विस्तार किया जा सके साथ ही हवाईअड्डे के संपर्क मार्ग पर सौंदर्यीकरण तथा लाइटिंग की व्यवस्था के साथ ही यात्री सुविधाओं के संबंध में भी चर्चा किया गया। बैठक में कुछ सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि जिस प्रकार बस सेवा प्रारम्भ कर दिया गया उसी प्रकार अब यहाँ पर ऑटो स्टैंड भी बना दिया जाए जिसपर अथॉरिटी द्वारा यह कहा गया कि यदि ऑटो यूनियन के पदाधिकारी हवाईअड्डे से शहर के लिए ऑटो चलाना चाहते हैं तो वे अथॉरिटी से मिलकर ऑटो चला सकते हैं। वहीं हवाईअड्डे के आसपास खुले में मीट मांस बेचे जाने के चलते बर्ड हिट होने के खतरे को ध्यान में रखते हुए उन दुकानों को बंद कराये जाने का प्रस्ताव रखा गया जिसपर जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा यह कहा गया कि उन दुकानों को चिन्हित कर दुकानदारों को दुकान बंद करने की नोटिस इस सप्ताह भेजी जाएगी और दुकान बंद न किये जाने पर उनके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जायेगी।साथ ही हवाईअड्डे के पार्किंग साइड के खाली पड़े स्थानों में सौंदर्यीकरण को लेकर व्यसायिक प्रतिष्ठानों और स्कूल कालेज को दिया जायेगा जिसमें वे पार्क बना सकते हैं।

बैठक में  सांसद रामचरित्र निषाद, एयरपोर्ट निदेशक डीएस गढ़िया, सुरक्षा प्रभारी एसके झा, एसडीएम पिण्डरा, विधायक अजय राय, एडीएम सप्लाई मनीलाल यादव, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी, जेई सुगुमार, अफ्ता सिंह, प्रभात सिंह, डॉ जेपी दुबे सहित अन्य लोग सम्मिलित हुए।

बैठक में शामिल अधिकारीगण

Tuesday, 6 September 2016

राजनीति की नर्सरी या पुलिस के लिए सिरदर्द


शहर में आया छात्रसंघ चुनावो का मौसम

अरशद आलम
----------------------

वाराणसी। बरसों से छात्रसंघ की छवि राजनीति की नर्सरी की है। देशभर के छात्रसंघों ने तमाम कड़ियल नेताओं को जन्म दिया है। पुरनिए न सिर्फ इस धारणा में अब भी यकीन करते हैं बल्कि इसे और पुष्ट भी करना चाहते हैं। मगर मौजूदा हालात पर गौर करें तो नजारा अलहदा है। तिथियां घोषित न होने के बावजूद शहर में इन दिनों छात्रसंघ चुनावों की गर्माहट महसूस की जा सकती है। आये दिन विभिन्न संभावित उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के बीच मारपीट और बवाल की खबरे आने लगी है। आरोप-प्रत्यारोप, मारपीट और मुकदमेबाजी की बहुतायत के चलते यह नर्सरी पुलिस के लिए नया सिरदर्द बनती जा रही है।

छात्र राजनीति की इस नर्सरी में कभी सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं की फसल लहलहाती थी। अब यहां भूमाफिया और अपराधियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, राजनैतिक दलों का बोलबाला है। तथाकथित रूप से अब भी छात्रों के हित की बात करने वाले छात्रनेता किसी न किसी पार्टी या रसूख वाले नेता का समर्थन रखते हैं। पिछले छात्रसंघ चुनावों में शामिल कई प्रत्याशियों का तो आपराधिक इतिहास भी रहा है। कालेज के यह छोटे चुनाव अब सम्मान की लड़ाई बन चुके हैं और लिंगदोह समिति की सिफारिशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

विभिन्न विश्वविद्यालय परिसर में गुण्डा गर्दी की घटनाये बढ़ गई है,  चुनावों में लाखों खर्च कर हजारों छात्रों के लिए लंगर का खाना चलता है। छात्रों को आई.डी. कार्ड समय पर नहीं मिलते जिससे चुनावों तक बाहरी लोग परिसर में घूमते रहते है। विश्वविद्यालय परिसर में छात्र आपस में भिडंते हैं, पुलिस पर पथराव करते है। प्रत्याशियों समेत कई छात्रों पर पुलिस केस दर्ज होते है।

धरना व जुलूस के द्वारा रास्ते रोके जाते है। छात्र गुट एक दूसरे के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराते है, विश्वविद्यालय के बाहर निजी व सरकारी सम्पतियों पर खुले आम पोस्टर लगाये जाते है। बिना स्वीकृति वाहन रेलियां निकालकर ट्रैफिक बधित किया जाता है।

पूर्व में अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से ही छात्रसंघों के चुनाव होते थे। उनमें जातिवाद, धनबल व बाहुबल का कोई स्थान नहीं था। राजनैतिक पार्टियों का छात्रसंघ चुनावों में दखल नहीं था। प्राध्यापकों व छात्रों की भागीदारी से चुनाव कार्यक्रम सम्पन्न होते थे।

इस प्रणाली से शत प्रतिशत छात्र चुनावों में भाग लेते थे। पहले छात्र कक्षाओं से अपने प्रतिनिधि चुनते थे और ये निर्वाचित कक्षा प्रतिनिधि छात्रसंघ के पदाधिकारियों का चुनाव करते थे। एक सौहार्दपूर्ण एवं लोकतांत्रिक वातावरण बना रहता था।

छात्रसंघों के कार्यक्रमों का खर्चा प्राध्यापकों व छात्रों की, गठित कमेटी की देख रेख में होता था। राष्ट्रीय नेता, शिक्षाविद्, जाने माने इतिहासकार, वैज्ञानिक, समाज सेवी, विचारक, कलाकार, साहित्यकार, छात्रसंघों के कार्यक्रमों में आते थे। शिक्षणेतर गतिविधियां एवं कार्यक्रम यथा सेमीनार, गोष्ठियां, व्याख्यानमाला, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन, मुशायरा, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं कलैण्डर के अनुसार चलती थी। छात्रसंघ की गतिविधियां शैक्षणिक कार्यक्रम का भाग होती थी और शिक्षाकोत्तर गतिविधियां मानी जाती थी।

छात्रसंघ द्वारा आयोजित गतिविधियां बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक विकास व विस्तार के लिए होती थी। छात्रों को राजनीति करना सिखाना उद्देश्य नहीं होता था। उस समय सरस्वती के इन मंदिरों में, पुलिस को प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। पुलिस प्रवेश को प्रिंसिपल व प्राध्यापक अपमान समझते थे। छात्रों पर उनका अनुशासन था, शांति व्यवस्था बनाये रखना अपना उत्तर दायित्व समझते थे, निभाते थे।

आज का छात्रसंघ चुनाव जातिवाद, धनबल, भुजबल, के आधार पर लड़ा जाता है। राजनैतिक दल खुलकर इन चुनावों में भाग लेते हैं। कई स्थानों पर तो चुनावी हिंसा होने लगी है। बुद्घिजीवी वर्ग, पढऩे लिखने वाले विद्यार्थी वर्तमान स्थिति व चुनाव तरीके के आलोचक हैं। अब राजनैतिक दलों के टिकटों पर चुनाव में भाग लेने वाले युवकों के कारण छात्र संघों  में पूर्णतया राजनीति घर कर गई है।

पढऩे लिखने वाले छात्रों की बड़ी संख्या चुनाव प्रचार व मतदान से दूर होते जा रहे हैं। उनके मत का कोई मूल्य नहीं रहा है। मतदान बाहरी प्रभाव से होते हैं। नीति, कार्यक्रम, योग्यता का कोई अर्थ नहीं रह गया। अब छात्रसंघ के चुनावों में केवल समाज में भय, आतंक, गैर वाजिब वसूलियां व कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही है। राजनैतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों का चयन जातिवाद के आधार पर होने लगा है।

चुनाव जीतने के लिए नये नये तरीकों, नियोजित योजनाओं, से मतदाताओं को खरीदने, दवाब डालने, नियमों की खुली अवहेलना करने, लंगर लगाने, विधान सभा व लोकसभा के चुनावों से भी अधिक खर्चीले प्रचार के बीच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष  चुनाव पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।

कुछ वर्षों  से ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामाजिक शांति में विघ्न होने लग गया है, कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने लगी है। विश्वविद्यालयों में जातिवाद व सामाजिक गुटबाजी फैलती जा रही है। आज विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ जाने से इन संस्थाओं को व्यापार व राजनीति का केन्द्र बना दिया है।

अब हालात यह है की, शांति बनाये रखने के लिए चौबीसों घंटे पुलिस बल विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में तैनात करना पड़ता है। प्रतिभावान छात्र असहाय अनुभव करते हैं और चुनावों में हिस्सा लेना पसन्द नहीं करते वे चुनावों से दूर ही रहना पसन्द करते हैं।

इन हालातों में विश्वविद्यालयो में शैक्षणिक वातावरण समाप्त हो रहा है। आज के छात्रसंघ के पदाधिकारियों को पढ़ाई लिखाई से भी कोई वास्ता नहीं रहता। वे अपने को भविष्य का नेता साबित करने में समय व्यतीत करते हैं। कुल मिला के यह खेल खतरनाक रूप ले रहा है और भविष्य में सत्ता की प्रथम सीढ़ी की इस पायदान की लड़ाई ने पुलिस प्रशासन का सरदर्द तो बढ़ा ही दिया है।
साभार

शुप्रभात

आपका दिन मंगलमय हो

Thursday, 1 September 2016

वाह रे सरकार कहाँ थी आपकी एम्बुलेंस

वाराणसी। बाबतपुर हवाई अड्डे पर बुधवार को एयर इंडिया के विमान AI - 433 द्वारा गया से दिल्ली जा रहे पैसेंजर राजेश त्रिपाठी की हालत खराब हो गई और इसके बाद उसे विमान से उतारकर हवाईअड्डे पर स्थित इमरजेंसी रूम में लाया गया जहां उसका इलाज किया गया लेकिन उसकी स्थिति चिंताजनक बन रही इसके बाद मौके पर पहुचे एयरपोर्ट निदेशक ने उसे तत्काल शहर भेजने के लिए सोचा और हवाईअड्डे से एंबुलेंस के लिए फोन किया गया लेकिन कोई भी सरकारी एंबुलेंस डेढ़ घंटे तक एयरपोर्ट पर नहीं पहुंचा अंत में हवाई अड्डे के फायर विभाग के एंबुलेंस के द्वारा बीमार यात्री को शहर में इलाज के लिए भेजा गया लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिस प्रकार सरकार दावे किए जाते हैं क्या यही दावे हैं क्या यही हकीकत है? और ऐसे इंटरनेशनल प्लेस पर डेढ़ घंटे तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंचा और यदि कोई बड़ा हादसा होगा तो ऐसे में क्या और कैसे चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराई जाएगी?

यह भी जानिए
पिछले माह 2 अगस्त को सोनिया गांधी वाराणसी में आई थी और वाराणसी में रोड शो के दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई उसके बाद उनको शहर से इलाज कराने के बाद वापस भेज दिया गया रास्ते में उनकी हालत और बिगड़ गई और हवाई अड्डे पर पहुचते ही उनको cip लाउंज में भर्ती किया गया लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं रहा। उनके साथ जो एंबुलेंस चल रही थी उसमें भी चिकित्सा की सुविधाएं नहीं थी यूरिनल पाट सहित कई उपकरणों को बाहर से मंगाया गया इस बारे में जनपद का पूरा स्वास्थ्य महकमा अपना बचाव करता दिखाई दिया लेकिन अब एक यात्री की जान चली गई और हवाईअड्डे पर डेढ़ घंटे में एंबुलेंस नहीं पहुंचा यह भी एक बड़ा सवालिया निशान है।

मृत विमान यात्री की फाइल फोटों

बीएचयू में बवाल, डॉक्टर हड़ताल पर

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर बुधवार की रात डॉक्टरों और छात्रों के बीच गुरिल्ला युद्ध की चपेट में रहा और देर रात तक तोड़फोड़ चलता रहा और जनपद के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर भी पहुचे। मामला केवल इतना कि बीएचयू के ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान डाक्टरों व छात्रों में कहासुनी हुई थी और आगे चलकर यही विवाद का रूप पकड़ा और बवाल हो गया। दोनों ओर से जमकर पथराव व तोड़फोड़ किये गए मरीजों के परिजन भी जान बचाने के लिए इधर उधर भागते देखे गए। देखते ही देखते ट्रामा सेंटर छावनी में तब्दील हो गया। गुस्साए छात्रों ने बीएचयू अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी जमकर तोड़फोड़ किया और दो दर्जन से अधिक बाइक को आग के हवाले कर दिए मामले को देखते हुए रात्रि में ही वहां भारी फ़ोर्स तैनात कर दिया गया और उसके बाद रात में ही कुलपति, डीएम, एसएसपी व अन्य अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई।

उसके बाद शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल कर दिए है और ट्रामा सेंटर से मरीजों को लौटा दिजा रहा है।

फोटों साभार