Tuesday, 26 May 2015

तो जनाब,सोशल मीडिया आपकी फसल चौपट कर देगी।

वाराणसी। आधुनिक समय में​ जितनी तेजी से सोशल मीडिया युवाओं को लुभा रही है उतना अधिक शायद ही कोई अन्य चीज लूभा रहा हो। मीडिया में सरकार के अधीन हो कर किये जा रहे विज्ञापनों और उनके समर्थन में चल रही झूठी खबरों का जवाब देने के लिये सोशल मीडिया ही सबसे नायाब तरीका है आप की मठाधीशी खतम हो जायेगी। अभी जिस प्रकार से यह उपजाऊ खेत में पैसे उग रहे हैं उसी तरह से आने वाले समय में सोशल मीडिया की मार पड़ते ही यह उपजाऊ भूमि बंजर होने वाली है। 

इसकी भनक बहुत से लोगों को पहले ही लग चूकी है और वे सोशल मीडिया पर अपने पॉव मजबूती से जमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं होने वाला क्योंकि जब आप सोशल मीडिया से जूड जायेंगे और झूठी खबरें चलायेंग तो उसका तत्कालिक जवाब भी आपके साईट पर मि​ल जायेगा इसलिये अभी भी मौका है क्यों नहीं सावधान हो जाते हैं यदि अभी नहीं सावधान हुए तो अन्त समय में विश्राम करने के अलावा कोई अन्य काम नहीं रह जायेगा आपके पास। आज समय ऐसा हो गया है कि विदेश में कोई चाटा खाता है तो उसकी गूंज सोशल मीडिया पर जरूर सुनाई देती है और कई दिनों तक गुंजती रहती है। 

गिने चुने संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को खुब शोषण किया है इसी कारण एक तरफ मजीठिया उनके कमर तोड़ रही है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया उनको आईना दिखा रही है ऐसे में आने वाला कल उनके लिये बहुत ही कष्टकारी होगा अभी से यह चर्चा होने लगी है कि उनकी उपजाऊ जमीं को बंजर बनते देर नहीं लगने वाली है।

तो, नेता जी आपको भी सुधरना होगा।
इसका असर केवल ​मीडिया जबत पर ही नहीं बड़बोले नेताओं पर भी रहेगा और आने वाले समय में उनको अपने जुबान पर लगाम लगाने की बहुत ही आवश्यकता हो जायेगी क्योंकि वहॉ आपकी जूबान फिसलेगी तो यहॉ आपकी लंगोट तक खींच देंगे सोशल मीडिया के सिपाही। जिस प्रकार से अनाप सनाप बकते वाले लोग नेता बनकर पढ़े लिखे लोगों के उपर अपना राज चलाते हैं और जूते की डोरी तक बंधवाने में कोई शर्म महसूस नहीं करते उन लोगों नाड़ा खोलने की तागत सोशल ​मीडिया के पास है और वे अपनी इस कर​तूत से खुद ब खुद शर्मिंदा हो जायेगे। राजनीति में भी काफी सुधार आयेगा यह ताकत अब सबके सामने है क्योंकि गोंडा के मंत्री जी चिल्लाते और गरियाते हैं तो सोशल ​मीडिया के माध्यम से गुजरता तक उसकी गूंज सुनायी देती है। 

लेखक 
प्रवीन यादव "यश"

साहब! विज्ञापन पैसे को खा रहा, नेता देश को खा रहे, लेकिन जनता भूखे मर रही है ?

वाराणसी। अभी कुछ दिन पहले केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे हो गये और इस दौरान बीजेपी सरकार या यूॅ केहें मोदी सरकार अपनी शेखी बघारने और अपने द्वारा एक वर्ष में पूरे किये गये कार्यों को जनता के सामने बताने के लिये खूब धन खर्च किया। यदि यही करोड़ों रूपया किसी जनपद के पीछे खर्च कर दिया गया होता तो वह दुनियॉ का सबसे सुन्दर जनपद बन ​गया होता मैं यह नहीं कहता कि सरकार को अपनी बातें लोगों के सामने नहीं बतानी चाहिए लेकिन क्या यह जरूरी है अभी तक तो काम बोलता है कि बातें करने वाले नमों के कामों की बोली बंद कैसे हो गयी।
केन्द्र सरकार के एक वर्ष पूरे होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेस के दौरान बताया कि यह एक समस्या है। लेकिन इसका हल ढूंढा गया है और अब इसमें काफी कमी आयी है। विवादास्पद बयान देने वाले नेताओं को उनकी जिम्मेदारी समझायी गयी है। लेकिन अनाप सनाप बाते मंच से बोल देने वाले इनके नेताओं और मंत्रियों की जुबान पर क्या सचमुच लगाम लग जायेगी यह तो भविष्य के गर्भ में है।
नमों सरकार ने सफाई अभियान चलाया देश को साफ सुथरा बनाने के लिये संकल्प दिलवाया गया बनारस की एकाध गलियों से लेकर घाटों तक की सफाई करते हुए मोदी ​मीडिया के विश्व पटल पर कई दिनों तक छाये रहे लेकिन आज एक वर्ष गुजर जाने के बाद उस स्थान को देखा जाय तो क्या वहॉ या उन गलियों में गन्दगी नहीं है जहॉ मोदी ने सफाई किया था जरूर है।
झूठ की बहाने बाजी अखबारों और चैनलों में पैसे के बल पर छाये रहना कोई मतलब नहीं रखता इन भोली भाली जनता पर।

इनके 8.67 करोड़ भक्त इनका प्रचार नहीं कर पाते हैं क्या?
मोदी सरकार में सबसे बड़ी यह बात देखने को आयी कि जब पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ रही थी उस समय भी मीडिया को बहुत अच्छे तरीके से मैनेज किया गया और इस समय भी ​मीडिया को काफी अच्छे तरीके से मैनेज किया जा रहा है लेकिन आज भी कुछ ऐसे समाचार पत्र और चैनल वाले हैं जो सीना ठोककर यह बता रहे हैं कि मोदी ने कुछ नहीं किया सिवाय बयानबाजी के।

इनके सांसद इस समय टीवी और अखबार पर ही दिखाई देते हैं क्षेत्र के लोग अपने आप को छला महसूस कर रहे हैं साथ ही यह भी कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो हम नोटा ही दबा कर आये होते जब एक आदमी से पूछा गया कि सांसद जी कुछ कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मेंढक तो बरसात होने के बाद भी दिखाई देते हैं और उसी समय टर्र टर्र टर्र टर्र भी करते हैं। देश में 8.67 करोड सदस्यों को अपने से जोडने के बाद यह दुनियॉ की सबसे बडी पार्टी का तमगा हासिल कर लिया यहॉ सवाल यह भी लाजमी है कि क्या उनके सदस्य उनका प्रचार नहीं करते हैं उनके काम के बारे में जनता को नहीं बताते हैं आखिर क्यों इतना रूपया सरकार को खर्च करना पड रहा है अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिये

ये जो पैसे खर्च करे नमों ने यह बताया है कि हमने साल भर में क्या क्या किया क्या वह उनकी पैतृक सम्पत्ति थी, अभी देश भर में दौड़ लगा रहे हैं क्या वह अपने पैसे से दौड़ रहे हैं?

नहीं यह धन सवा सौ करोड़ देशवासियों का है और देश के जनता की गाढ़ी कमाई है मुझे पता है यह मीडिया जब भौंकती है तो आप उसपर प्रसाद स्वरूप विज्ञापन परोस देते हैं और सच्चाई जनता के सामने आने से छूपी रहती है लेकिन सोशल मिडिया भी एक ताकत है इसे मत भूलिये यहॉ किसी कि नहीं चलती यहॉ सूट तक की बात छोडिये पैंट के अन्दर का भी आंकड़ा प्रकाशित किया जाता है। 

लेखक 
प्रवीन यादव "यश "
कापीराईट के अधीन

Thursday, 7 May 2015

ई-गवर्नेंस वाले गांव में ई-अनपढ़ मुखिया, तो..सरकार यहाँ है बदलाव की जरुरत है।

फोटों AU देहरादून से साभार
वाराणसी।देश के विकास में गांवों का बहुत बड़ा योगदान और समर्थन रहता है गांवों से देश की राजनीती तय होती है और यही लगभग 60 प्रतिशत आबादी  देश के मुखिया को तय करती है और गांव -गांव में अपना मुखिया भी चुनती है।
लेकिन सत्ता या ऊँचे ओहदे पर पहुचने के बाद इनके द्वारा चुने गए लोग ही इनको नकारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।सुविधाओं के लिए आने वाले पैसे को जनता से ज्यादा अपना पैसा समझकर हजम कर जाते हैं प्रधानजी। हालाँकि माँ बाप का हर बेटा नालायक नहीं होता लेकिन इस समय नालायकों की संख्या भी कम नहीं है।
आने वाले कुछ महीनो में उत्तर प्रदेश के गांवों में ग्राम प्रधान का चुनाव होने वाला है जनता द्वारा गांव का मुखिया चुने गए लोग पिछले चार वर्ष तक अपना पेट भरने में ही काफी समय बर्बाद कर दिए और अब जब सर पर चुनाव का नशा सवार हुआ तो ग्रामीणों का पेट भरने निकल रहे हैं अपना वोट बैंक सेट करने में लग गए है कल बल और छल का पूरा प्रयोग कर रहे हैं। ये मुखिया अपना वोट बनाने के लिए ग्रामीणों के उपयोग हेतु रास्ते बनवाने से लेकर नास्ते तक का इंतजाम खुद कर रहे हैं। इसी में फंस जाते हैं ये भोले भाले लोग और पांच साल तक दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ गांवों में महिला का सीट आरक्षित है वहाँ से महिला प्रधान हैं लेकिन महिला बस नाम की मुखिया है काम तो प्रधानजी अर्थात प्रधानपति ही करते हैं।
जैसा की हम सब जानते हैं गांवों से ही देश की राजनीती तय होती है और यहीँ यदि दीमक लग रहा है तो यह पुरे देश को खोखला बना देगा। आयोग को इसपर विचार करना होगा और कुछ संसोधन भी करने होंगे क्योंकि समय रहते यदि बदलाव नहीं किया गया तो इस डिजिटल और ई गवर्नेंस के जवाने में जनता अपने आप को ठगा महसूस करेगी।
देश के प्रधानमंत्री देश के गावों को डिजिटल रूप देने के लिए तमाम योजनाएं चला रहे है और प्रदेश सरकार भी काफी सराहनीय कार्य कर रही है लेकिन क्या फायदा जब गांव का मुखिया ही अंगूठा छाप रहेगा जिसे मोबाइल तक चलाने की जानकारी नहीं रहेगी और जिसके लेटर पैड पर उसके नाम का हस्ताक्षर कोई और बनाएगा।

बदलाव को जनता स्वीकार रही है लेकिन यहाँ यक्ष प्रश्न यह है कि क्या प्रधान को उपरोक्त जानकारियां नहीं होनी चाहिये? 
यदि पढ़े लिखे और शिक्षित प्रधान रहेंगे तो ये गांव को तरक्की के लिए मजबूत रास्ता तैयार करेंगे और प्रधान से लगायात प्रधानमंत्री तक को चुनने में इन गांवों के लोगों का मताधिकार भी गलत नहीं जायेगा। 
ई गवर्नेंस की अच्छी शुरुआत यह साबित कर रही है की आने वाले समय में बची कूची सुविधाए भी ऑनलाइन हो जाएंगी और ग्रामीणों को इस प्रणाली से काफी लाभ मिल रहा है तो क्यों न गांव का प्रधान भी डिजिटल हो और देश के विकास में अपनी भागीदारी दर्ज कराये। यदि बदलाव किये बगैर चुनाव करा दिया  जायेगा तो फिर कोई विकास नहीं हो सकता और ना ही जनता इस डिजिटल युग को समझ पायेगी। खेती से लेकर खाता तक सभी सुविधाओं की जानकारी ऑनलाइन है तो फिर कलम न चला पाने वाला मुखिया कीबोर्ड कैसे चलाएगा कैसे सही और गलत की जानकारी ग्रामीणों को मिलेंगी।

Saturday, 2 May 2015

भूत प्रेत के चक्कर में दिन रात रटवाया 'हूजूर मैं हीरालाल'

दरवाजे पर लगा टीका,               यही हैं हीरालाल,                     घर पर  एकत्र पड़ोसी।
वाराणसी। 21 सदी में जहॉ मानव देश विदेश के बारे में तत्काल जानकारियॉ प्राप्त कर रहा है तथा तमाम प्रकार की कूरितियों पर लगाम लगा रहा है वहीं कुछ लोगों और जगहों पर अंधविश्वास आज भी हावी नजर आता है ऐसा ही हाल देखने को मिला वाराणसी के फूलपुर थानान्तर्गत थाने गॉव में। गॉव का 55 वर्षीय हीरालाल मौर्या के मन में भूत प्रेत की बातें इस प्रकार घर बनाया ली कि वह अपने परिवार के लोगों को भी नहीं बक्सा और दो दिन तक अपने नाम अर्थात 'हूजूर मैं हीरालाल' का जाप करवाया और लोगों को खाने पीने
तक नहीं दिया फिलहाल बाद में इसकि सूचना ग्राम प्रधान को हुई वे पुलिस को सूचित किये और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिवार वाले अभी भी डरे और सहमें हैं।

डर के मारे भूखे प्यासे लोग रटते रहे 'हूजूर मैं हीरालाल'।

पत्नी रजपत्ति देवी ने बताया कि दो बेटों में छोटा बेटा विवेक कानपुर में अपने परिवार के साथ रहता है और बिस्किट फैक्ट्री में काम करता है तथा बड़ा बेटा विनय मौर्या घरपर ही रहकर त्रिलोचन स्थित एक बिस्किट फैक्ट्री में काम करता है। उन्होने पति के बारे में बताया कि उनकी हालत चार दिन पहले खराब हो गयी और जिसके चलते वे बड़े बेटे विनय व उसकि पत्नी तथा ​तीन बच्चों को गुरूवार की रात में कमरे में बन्द कर दिया और उनसे एक ही रट लगवाने लगा 'हूजूर मैं हीरालाल' ऐसा न बोलने या विरोध करने पर हीरालाल परिजनों को मारने पीटने लगते। 

परिजनों ने 25 वर्ष की बेटी पर भी भूत प्रेत का साया बताया।
उनके घर में उनकी बेटी सुषमा का भी वही हाल है उसकि मॉ ने बताया कि कुछ माह पहले वह गॉव में घूम रही थी उसी दौरान से उसके उपर ब्रम्ह देवी की सवारी हो गयी है जिसके चलते वह हमेशा परेशान रहती है और परिजन भी परेशान रहते हैं उन्होंने यह भी बताया कि बेटी का कई जगह इलाज करवाया लेकिन ठीक न हो पाने के कारण उसका झाड़ फूॅक करवाया जा रहा है जिसके चलते उसके हालत में कुछ सुधार आयी है। 

हीरालाल अपने पोते को ही पीटकर कर दिया अधमरा। 

पड़ोसियों ने बताया कि घर में बंद कर अपने नाम का जाप करवाने के दौरान जाप करने का विरोध करने पर हीरालाल ने अपने पोते आनंद को मारपीट कर घायल कर दिया जिससे उसकि हालत नाजुक बनी हुयी है फिलहाल बड़ी बहू अपने बेटे को लेकर अपने मायके मड़ियाहूॅ जौनपुर चली गयी है जहॉ उसका इलाज चल रहा है।

डाक्टर ने बताया यह मानसिक रोग से ग्रस्त  है 

इधर जब हीरालाल को पिण्डरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लाया गया तो वहॉ के प्रभारी चिकित्सक हरिशंकर मौर्या ने उसे मानसिक रोग से ग्रस्त बताया और उसको दवा देने के साथ ही तत्काल पं0 दीन दयाल राजकीय अस्पताल के लिये रेफर कर दिये।

Friday, 1 May 2015

तो यूपी पुलिस की एैसी—तैसी कर दे रहे हैं सपा के सपूत।

अधिकारियों को आपबीती सुनाते थानाध्यक्ष व सिपाही।
वाराणसी। राजनेताओं से लेकर जनता तक की रक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है लेकिन सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेता पुलिस को अपना नौकर समझ रहे हैं और उसे जब चाहें तब कठपुतली की तरह नाच नचाना चाहते हैं जहॉ पार्टी के मुखिया द्वारा इन छुटभइया नेताओं को समय समय पर चेतावनी दी जाती है कि कोई भी गलत काम न करें और न ही पार्टी की छवि खराब करें लेकिन यही हाल रहा तो पार्टी की छवि मटियामेट करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कुछ नेता। 

पिछले दिन वाराणसी जनपद के एक दरोगा को पार्टी महानगर अध्यक्ष ने जीभ काट लेने  की धमकी फोन से देते हुए सुने गये थे और उसके बाद वह रिकार्डिग सोशल मिडिया पर खूब वायरल हुई। फर्रूखाबाद में सपा के मुखिया मुलायम सिंह के कार्यक्रम के बाद पुलिस लाईन में अन्दर जाने से रोकने के बाबत जहानगंज थानाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार मिश्रा, दरोगा मनोज कुमार, हरिओम त्रिपाठी व सिपाही मुकुल कुमार को सपा के जिलाध्यक्ष सहित कुछ लोगों ने पीट दिया तथा रोड पर ही धरने पर बैठ गये तथा पुलिस प्रशासन के खिलाप नारेबाजी करने लगे बाद में डीएम एनकेएस चौहान व एसपी विजय यादव से जिलाध्यक्ष, सतीश दीक्षित दर्जा प्राप्त पूर्व मंत्री सहित अन्य छूटभैये नेताओं ने थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाप ठोस कार्यवाही करने की शिकायत किये उच्चाधिकारियों द्वारा पुलिस कार्यवाही का आश्वासन देने पर लोग शान्त हुए। फिर जब अधिकारी गण पुलिसर्मियों से इस बाबत जानकारी लिये तो वे अधिकारियों के सामने रो पड़े वाह रे नेता तेरी नेतागिरी की धौंस से वर्दीधारी रो दिये।  यह काफी शर्म का विषय है।

क्यों यह सत्ताधारी लोग सत्ता के नशे में चूर हैं? 

यदि इसी प्रकार से सत्ता पक्ष के लोग पुलिस को अपना नौकर समझते रहे तो आने वाले समय में पुलिस की कार्य करने की प्रवृत्ति बदल जायेगी। पुलिस के लोग नेताओं से डरकर काम करना प्रारम्भ कर देंगे। इस बारे में विचार करने की जरूरत है।