Tuesday, 11 September 2012

वरूणा को बचाने के लिये राज्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल ने दिया आश्वासन




जिलाधिकारी  से बात कर वरूणा को बचाने का आश्वासन देते राज्य मंत्री–  सुरेन्द्र सिंह पटेल

वरूणा को बचाने के लिये साधु-संतो, ग्राम प्रधानों तथा क्षेत्रीय नागरिकों के सहयोग से चलाये जा रहे अभियान के तहत सोमवार को पांचोशिवाला में आयोजित कार्यक्रम में लोक निर्माण एवं सिंचाई राज्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल ने आकर अभियान के लोगों के चार सुत्रीय मांगों को सुनने के बाद आश्वासन दिये कि वरूणा देव नदी है इसे बचाने का पुरा प्रयास किया जायेगा व अभियान के मांगों को स्वीकारते हुए एक माह में उक्त मांगों पर कार्य कराने का आश्वासन दिये।
ज्ञात हो कि चार माह से वरूणा बचाओ अभियान के तहत सेवापुरी विकास खण्ड, आराजी लाईन विकास खण्ड, हरहुआ विकास खण्ड के गॉवों तथा वरूणा तटीय मंदिरों पर साधु संतो व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आन्दोलन चलाया जा रहा था लोगों को मांग था कि वरूणा नदी मंे नाले व सीवर का पानी बहाया जाता है जिससे वरूणा का जल अब दूषित होता जा रहा है तथा वरूणा के जल में नाले का पानी मिल जाने से जल भी दूर्गन्धयुक्त हो गया है। जिस कारण आज वरूणा मे  से जलीय जन्तु विलुप्त होते जा रहे हैं शहर में नाले व सीवरों से निकलने वाले दूषित पानी को वरूणा में गिराने से रोका जाय जिससे वरूणा के जल निर्मलता व पवित्रता बनी रहे। तथा गर्मी के दिनों में जब पानी किल्लत चहुओर होती है उस समय यह देव नदी भी सूख जाती है जिससे मवेशियों व किसानों को जल के लिये समस्याओं का सामना करना पड़ता है यदि नदी  में शारदा सहाय व ज्ञानपुर नहर प्रखण्ड से पानी छोड़ा जाय तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होगी तथा वरूणा मंे हमेशा पानी रहेगा तथा वरूणा में पुराने पुल पर सिंचाई विभाग द्वारा फाटक बनाये जाने से गंगा तथा वरूणा अलग हो जाती है जिसे तत्काल प्रभाव से खोलवाया जाय। जिससे वरूणा तथा गंगा दोनों नदियों का संगम बना रहे व वरूणा की अविरलता भी बनी रहे। आन्दोलन का अखिरी मांग था कि वरूणा के तटों पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करके बड़े-बड़े मकान बनवा लिये गये हैं जिससे वरूणा सकरी होती जा रही है, विकास प्राधिकरण द्वारा सर्वे कराकर अवैध निर्माण ध्वस्त कराये जाय जिससे वरूणा धार चलती रहे।
 
अभियान की बातों को ध्यान में रखते हुए लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल ने कहा कि जिलाधिकारी से बात कर एक कमेटी गठित की जायेगी जो वरूणा को बचाने के लिये काम करेगी। उन्होने यह भी कहा कि वरूणा में सीवर व नाले के पानी को रोकने के लिये नगर निगम के लोगोें से बात कर गन्दे पानी को ट्रीट मेण्ट प्लान्ट में डाला जायेगा तथा वरूणा नदी के दोनों किनारों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों पर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी व नदी का जल सूखे न इसके लिये शारदा सहाय व ज्ञानपुर नहर प्रखण्ड से सर्वे कराकर लिंग नहर लाकर नदी में जोड़ा जायेगा जिससे वरूणा के जल पवित्रता व निर्मलता हमेशा बनी रहे। तथा अभियानम की मांगों को मुख्यमंत्री तक ले जायेंगे।
इस आश्वासन के बाद वरूणा बचाओ अभियानम के सदस्यों ने वरूणा बचाओ अभियानम को स्थिगित करने का निर्णय लिया। सराहना राज्य मंत्री ने भी किया।
 कार्यक्रम में मधुबन यादव, सुबास यादव, रतन यादव, हिटलर सिंह, घनश्याम सिंह, घनश्याम पाठक, हंसराज यादव, बांके लाल कन्नौजिया, शोभनाथ यादव, बरखु यादव, श्रवण पाण्डेय, जितेन्द्र विश्वकर्मा, इमरान बीडीसी, जयचन्द मोदनवाल आदि लोग शामिल रहे।

प्रवीन यादव ‘यश‘

Saturday, 11 August 2012

जन्माष्टमी


 मनायी गयी जन्माष्टमी
रामेश्वर-वाराणसी (एसएनबी)। स्थानीय क्षेत्र के अन्तर्गत स्थित राधाकृष्ण मंदिर रामेश्वर, नन्द भवन में पेडूका, जगापट्टी, खेवली, कपरफोरवॉ, व हरहुआ क्षेत्र में आदि शक्ति मां दुर्गा धाम देवनाथपुर, हरहुआ डीह, युवा विकास स्पोटिंग क्लब चन्दीपट्टी, हरहुआ, कोईराजपुर, बैराजपुर, भगतुपुर, दासेपुर सहित अन्य जगहों पर शुक्रवार को धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। जिसमें रात्रि तक भजन कीर्तन किया व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।

Sunday, 24 June 2012

मॉ वरूणा को बचाने के लिये हुआ यज्ञ


जंसा स्थित दिब्य दरबार आश्रम में मॉ वरूणा को बचाने के लिये यश्र करते साधु सन्त व ग्रामीण


माँ वरूणा बचाओ अभियान के अन्तर्गत रविवार को जंसा स्थित द्विब्य दरबार आश्रम प्रांगण में दण्डी स्वामी जगदीष्वरानन्द जी महाराज के सानिध्य में पानी न होने से दम तोड़ रही आदि गंगा माँ वरूणा में पानी भरे जाने के लिये साधु संतों व वरूणा प्रेमीयों ने यज्ञ कर वरूणा को बचाने का संकल्प लिया।
रविवार 24.06.2012 को प्रातः 10 बज गोरक्षा के सदस्यो व ग्रामीणों ने माँ वरूणा के अस्तित्व को बचाने के लिये यज्ञ कर संकल्प लिया कि वरूणा में जब तक पानी नी छोड़ा जाता तब जक वरूणा प्रेमी शान्त नहीं बैठेंगे। इस मौके पर दण्डी स्वामी जगदीष्वरानन्द जी महाराज ने कहा कि वरूणा हमारी माता है तथा आज पानी न होने के कारण माँ वरूणा कराह रही हैं व जनता परेसान है लेकिन इन सब बातों का कुम्भकरणीय निद्रा में सो रहे प्रशासनिक अधिकारियों को तनिक भी परवाह नहीं है। उन्होने चेतावनी दिया कि अगर प्रशासन इसी तर मौन बैठी रही और वरूणा में पानी नही छोड़ा गया तो जनता सड़क पर उतर कर उसका मुहतोड़ जवाब देगी।
इस मौके पर देवी बाबा,प्रकाशानन्द जी महाराज,सन्त दयाराम बाबा, सन्तोष पाण्डेय, त्रिलोकी पाण्डेय,अंकित सिंह, रिषु सिंह, रामजी दूबे, अभिषेक सिंह, प्रेमनारायण, सभाजीत पाण्डेय, गुलाब सिंह, खरपत्तू पटेल, सुनील शर्मा, आलोक दूबे, छोटेलाल, दिनेश, मोहनलाल सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

Friday, 22 June 2012



वरूणा को बचाने के लिये गुरूवार को शायंकाल युथ कांग्रेस सेवापुरी के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रीतम कुमार शुक्ला के नेतत्व में समाजसेवियों के बैठक का आयोजन बड़ौरा बाजार किया गया। जिसमें वरूणा नदी के अस्तित्व को बचाने के लिये चलाये जा रहे आन्दोलन को और तेज करने के लिये रणनीति तैयार कर षिव,हनुमान स्तुति पाठ व प्रार्थना किया गया। लोगो ने शारदा सहायक,ज्ञानपुर नहर प्रखण्ड के अधिकारियों कीे बुद्वि के लिये षिव व हनुमान स्तुति पाठ किया। वरूणा को बचाने के लिये जूटे समाजसेवियों ने लोगों को संकल्पित कराया व कहा कि जब तक वरूणा मे पानी नहीं छोड़ा जाता व शहर में गिर रहे नाले व सीवर का पानी नहीं रोका जाता तब तक आन्दोलन में इसी तरह चलता रहेगा। 
इस मौके पर विरेन्द्र शर्मा, अमरनाथ पटेल,बबलु राय, राजाबाबू, ईस्लाम, काशी सिंह, जमीर आलम, अनिल, विवके शुक्ला, सर्वेष शुक्ला, छेदी अली, मुहम्मद अली आदि लोग उपस्थित रहे। 

Wednesday, 20 June 2012

मॉ वरूणा को बचाने के लिये हुआ यज्ञ



मॉ वरूणा को बचाने के लिये दानुपुर में ग्रामीणों संग यज्ञ करते गोरक्षा प्रमुख राधेश्याम सिंह उर्फ लल्लू  बाबा

वरूणा को बचाने के लिये ग्रामीणों ने मंगलवार को सायंकाल सेवापुरी ब्लाक के  दानुपुर गॉव स्थित प्राचीन काली मंदिर पर यज्ञ किया जिसमें सरकार द्वारा वरूणा पर ध्यान न दिये जाने पर रोष प्रकठ करते हुए गोरक्षा प्रमुख राधेश्याम सिंह उर्फ लल्लू बाबा ने कहा कि प्रशासन द्वारा ध्यान न दिये जाने के कारण वरूणा आज अस्तित्वीन हो गयी है तथा नदी की सफाई न होने से इसमें मिट्टी इतना ज्यादा जमा हो गयी हैं कि पानी एकत्र ही नहीं हो पाता है जिस कारण गर्मी में वरूणा पुरी तर सूख जाती है तथा इसमें नालों,कल कारखानों तथा सीवर आदि का गन्दा पानी बहाये जाने से अब जलीय जीव जन्तु भी नाम मात्र ही बचे हैं उन्होनंे कहा कि समय समय पर सरकार द्वारा वरूणा को प्रदुषण मुक्त करने की तमाम योजनाऐं सामने आती हैं लेकिन कोई योजना कारगर रूप से लागु नहीं हो पाती है वरूणा को बचाने के लिये आज सभी को आगे आना होगा नहीं तो मोक्षदायिनी वरूणा केवल इतिहास के पन्नों में शामिल होकर रह जायेगी। यज्ञ में पं0 सभाजित पाण्डेय आचार्य, धनन्जय पाध्याय, राजन्द्र सिंह, सन्तोष मौर्या, जय प्रकाश पटेल, विनोद विष्वकर्मा,  महेन्द्र सिंह चन्देल, प्रेम नारायण पटेल, अभिषेक सिंह, बैजनाथ पटेल, गुलाब सिहं, देवानन्द सिंह, विशाल कुमार,शान्ति सिंह, त्रिलोकी पाण्डेय सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। 20-06-2012 को खरगुपुर से पदयात्रा निकाली जायेगी। राष्टीय सहारा वाराणसी पत्रकार रामेश्वर प्रवीन यादव प्रकाशित तिथि 20-06-2012 पेज-6

Sunday, 25 March 2012

पेट की खातिर


पापी पेट की खातिर सब करना होता है


लगन आने से डलिया दौरी बनाने में मशगूल धरकार परिवार

ग्रामीण अंचलों में बास के द्वारा डलिया दौरी बनाकर परिवार का पालन पोषण करने वाले मजदूरी को अब पेट पालना भी मुश्किल हो गया है। डलिया दौरी के धंधे पर भी महंगाई का बहुत ज्यादा असर पड. रहा है। कोईराजपुर, दासेपुर सहित अन्य गांवों में रोड के किनारे टूटे-फूटे मकान में रह रहे धरकार जाति के लोगों को देखकर ही उनकी गरीबी साफ झलकती नजर आती है। आजमगढ.  से आकर कोईराजपुर गाॅव में काशी कृषक इण्टर कालेज के बगल में निवास कर रहे धरकार रामदुलार, गुलाब, सुरेन्द्र, पवन आदि का कहना है कि महॅगाई इतना ज्यादा हो गया है कि एक बास सौ रूपये से लेकर एक सौ पचास रूपये तक मिलता है जिसमें एक बडी और एक छोटी दौरी ही बन पाती है। उसने बताया कि हरे बास को खरीद कर लाने के बाद उसे तुरन्त फाड. दिया जाता है व एक दिन सुखने के बाद उससे दौरी बनाया जाता है। लोगों ने बताया कि रात दिन कडी मेहनत करने के बाद एक आदमी केवल एक ही दौरी बना पाता है जिसकी किमत दो सौ दस रूपये से लेकर दो सौ पचास रूपये तक होता है। इनके बीबी बच्चे भी इनके ही काम में हाथ बटाते हैं। इन लोगों ने बताया कि बरसात के समय में डलिया दौरी की बिक्री कम हो जाती है जिसके कारण सूद का पैसा लेकर परिवार का पालन पोषण कर पाते हैं पैसा न रह पाने से कभीकभी फांका भी चल जाता है। लकिन गर्मी में लगन का समय आ जाता है जिसके कारण इसकि खींच बाजार में अधिक हो जाती है। जिस कारण धूपछाॅव को देखे बिना रातो दिन मेहनत करके ये अपने व्यवसाय में लगे हुए हैं कयोकि पापी पेट का आग बूझाने के लिये कुछ न कुछ करना तो जरूरी है।

Wednesday, 1 February 2012

मतदान 2012




सूक्खू दादा बोल पड़ेः- ई मतदान का होला भीया
चुनाव जितना ही नजदीक आ रहा है सभी राजनीतिक पार्टीयों के प्रत्यासी चुनाव में अपना प्रचार व प्रसार करने में रात दिन एक करके लगते जा रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं। निर्वाचन आयोग भी कड़ी रूख किया हुआ है। ऐसे में प्रत्यासियों की लाउडस्पीकर की आवाज इस बार दब चूकी है कहीं से भी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। केवल एक ही आवाज चारों तरफ से आ रही है वह है मतदान करो मतदान करो। स्कूलों कालेजों व समूहों के माध्यम से सभी लोगों से मतदान करने का आग्रह किया जा रहा है। दोपहर के समय पान की दूकान पर चार-पाच बुजूर्ग चाय-पान कर रहे थे। पहले चाय फिर पान उसके बाद राजनीतिक चर्चा न हो यह हो ही नहीं सकता। सूक्खू दादा का समूह पान खाया तभी रोड पर विद्यालय के बच्चे बैनर और पोस्टर लिये मतदान करों-मतदान करो का नारा लगाते नजर आये। उन लोगों के चले जाने पर सूक्खू दादा पूछ पडे़ कि एह बार वोट न देवे के होई का वोटिया क नाम त कहीं सुनईत ना हव बस मतदान करा मतदान करा लेकिन ई बतावा कि मतदान का होला भीया। बिरजू दादा थोड़े व्यंगात्मक मिजाज में बोल पड़े कि मतदान क मतलब दान मत करा। सुक्खू दादा गुस्साये और तपाक से उठकर बोले सरमदान करे, कन्या दान करे, अन्नदान करेे  सरवा दान करत करत पुरा उमर बीत गईल अ आजू काली क लड़का हमके सिखावत हऊअन की मत दान करा। करब दान हम - दुकान पर आस पास बैठे सभी लोग ठहाका लगाकर हॅसने लगे। तभी बगल से नखडू दादा बोले हसा मत आर सूक्खूआ अबहीं ‘नादान’ हव ओके का पता का ‘मतदान’ हव।

Friday, 20 January 2012

विचार- मंथन



समाज को काहिल बना रही भिक्षावृत्ति
भारत में आदि काल से ही दान करने की परंपरा चली आ रही है दान मांगने पर कई दानवीरों ने अपने प्राण तक दान दे दिये जैसे कर्ण, महर्षि दधिची,बलि ,रघु, शिव और हरिश्चन्द। इन लोगों का नाम आज भी हमारे देश में आदर व सम्मान के साथ लिया जाता है। आज और कल के दान देने में काफी परिवर्तन हो गया है पहले के समय में कोई प्रजा अपनी राजा से दान मांग लेता था या राजा द्वारा प्रजा को दान दे दिया जाता था या संकट की घड़ी में जीवन दान भी दे दिया जाता था। लेकिन आज के समय में यह धीरे-धीरे एक व्यवसाय का रूप अख्तियार करती जा रही हैै। आप मंदिरो या रेलवे स्टेशन अथवा ट्रेन में ऐसे तमाम लोगों से मिलते हैं जो ना तो अपाहिज होते हैं और नाही भिक्षा पाने के पात्र होते हैं लेकिन फिर भी उनपर किसी प्रकार का बहस न करते हुए आप उन्हे भिक्षा दे देते हैं। कहीं-कहीं तो लंगड़ा व अंधा बनकर बच्चों के सहारे गीत गातें हूए भीखारी पूरी ट्रेन का सफर करते हूए मिल जाते हैं ऐसे में उनके साथ छोटा बच्चा महज चार या पाॅच साल का होता है प्रश्न यह उठता है कि वह अपने साथ उस छोटे बच्चे को भी भिखारी बना दे रहा है। यदि बचपन से किसी बच्चे को ऐसी प्रवृत्ति में पाला जाये तो वह आगे जाकर क्या करेगा इसका अनुमान आप लगा सकते हैं। एक अनुमान के अनुशार केवल भारत देश में 3000 करोड सालाना भिख में लिया व दिया जाता है।
समाजशास्त्रियों ने भिक्षावृत्ति को अपराध माना है। अब यह कानून के उल्लंघन से जुड़ गयी है। भिक्षावृत्ति खासकर बच्चों को काहिल बना रही है तो कुछ बच्चे अपराध का रास्ता पकड़ने को मजबूर हो रहे हैं। विभिन्न बाजारों मुहल्लों व धार्मिक स्थलों पर भिक्षा मांगते महिलाओं, पुरूषों व बच्चों का झुण्ड नजर आता है जिसमें ज्यादातर अपात्र होते हैं। दीन-दुखियों अपाहिजों व अनाथों को दान देने की परम्परा पुण्य लाभ से जोड़ी गयी है। यही परम्परा अब समाज में कोढ़ बनती जा रही है। भिक्षावृत्ति कर आसानी से दाल रोटी चलाने की प्रवृत्ति में कुछ महिलाओं व बच्चों में यह रास्ता अख्तियार करने में सहयोग किया है। दया भाव व पुण्य लाभ के चलते लोग भिखमंगों को दरवाजे से खाली हाथ नहीं जाने देना चाहते। लोगों की इस कमजोरी का फायदा कपितय पेशेवर भिखारी उठा रहे हैं कुछ तो नकली अपाहिज व बहूरूपिया बनकर लोगांे को ठगने का काम करते हैं। दिनों दिन गम्भीर होते जा रहे इस सामाजिक विषय पर रामेश्वर पंचक्रोशी क्षेत्र के पण्डित शारदा प्रसाद पाण्डेय व राधाकृष्ण मंदिर के महंत राममूर्ति उर्फ मद्रासी बाबा ने कहा कि शास्त्र के अनुसार दान करने से धन बढ़ता है एश्वर्य वृद्धि होती है पुण्य मिलता है लेकिन पात्रों को ही दान देना चाहिए। किसी स्वस्थ्य बच्चे व किशोर को दान देना उनके भविष्य व सामाजिक विकास में बाधक बनना है। कानूून विरोधी यह कृत्य सामाजिक रूप से भी एक अनुचित कदम है। हालांकि सभी तीर्थ स्थानों पर यह गलता परंपरा हावी है। माॅ बा पके साथ दूधमूहें बच्चे को भी दिखाकर पैसा मागने का काम किया जा रहा है। विडंबना यह है कि अधिकारी व कानून के रखवाले इस तरफ ध्यान नहीं देते या यह एजेंडा उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं है लेकिन इससे धीरे-धीरे समाज में घुन लग रहा हैै।

Sunday, 15 January 2012

कुछ पल के लिये



                   कुछ पल के लिये
सोचता हू कुछ पल के लिये खामोश हो जाऊ मै।
धुधली हूई धूंध सी यादों में खो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
उनको देखता हू तो बोलने की चाहत जाग जाती है।
कोई अपना बड़ी दूरी है और उसकि याद आती है।।
उस अपने पन की यादों के आगोस में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
लाख कस्में वो पल में दिला जाते हैं।
फिर कस्मों को कैसे भुला जाते हैं।।
आखें खुली हो और सपनों में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
दर्द कितना है इस दिल में प्रवीन जानता है।
अस्क सूखे नहीं अभी वो रात दिन जानता है।।
छोड़कर ये दुनिया सरफरोश हो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
माता का प्यार तो बचपन से मिला मुझको।
बीबी का प्यार तो जीवन में मिला मुझकों।।
फटे आचल के टूकड़े में टूटकर सो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।

Saturday, 7 January 2012

जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई





उनसे एक पल में ऐसे मोहब्बत हुई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।
मै ना सोचा ना समझा कभी भुलकर ये सुलगती हुई आग जल ही गई।।
छूट जाये जहा तो भी गम ना रहे
अश्को से मेरी आखें भी नम ना रहें
चाहे चल जाये जीवन मेरा गम नहीं
मेरी चाहत पर कोई सितम ना रहे
अब दूखों और सुखों में हम कैसे हसें जब ये अश्कों की डोली निकल ही गई।
उनसे एक पल में ऐस मोहब्बत हूई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।।
इस मोहब्बत में ऐसा करम हो गया
जैसे लगता है दिन रात कम हो गया
अब ये रोती हूई आखें हैं पूछती
हम मिले अखिर क्यों क्यों जनम हो गया