Wednesday, 11 December 2013

आप ने कर दिया सूपड़ा साफ़

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने इस प्रकार अपनी गति का बढ़ाया कि अन्य दलों को यह मानने पर मजबूर होना पड़ा की आने वाले समय कि राजनीति आसान नहीं होगी लोगों को बहकाना और भटकाना अब आसान नहीं होगा। जिस प्रकार से दिल्ली में चुनाव हुए और चुनाव के नतीजे आने के बाद बहुत से सियासी दलों ने दांतों तले अंगुलियाॅ दबाते हुए यह मानने के लिये तैयार हो गये कि अब जनता जाग गयी है और उसकी रोटी पर बातों का मक्खन लगाने से काम नहीं चलने वाला है इसी कारण लोगों ने लोकसभा चुनाव से पहले ही तैयारियों में तेजी ला दिया है और सभी पार्टीयाॅ कहीं न कहीं आप को देखकर ही चल रही हैं और उसी रास्ते पर चलने से ही अपनी जीत समझती हैं।
कुछ सवाल आज हमारे और आप के जेहन में हैं जिनका जवाब खोजने का मैने काफी प्रयास किया और कर रहा हूॅ, कि यदि अन्ना हजारे आज भी आप के साथ रहते तो शायद आज दिल्ली में आप की सरकार होती। आप ने इस तरह से झाडू चलाया कि सभी पर्टीयों द्वारा किये गये वादों के मक्खन साफ हो गये। मेरा मानना है कि यदि आप भाजपा के साथ मिलकर सरकार न बनाकर फिर से चुनाव कराने पर ही अड़ जाती है तो अगली बार होने वाले चुनाव का परिणाम अत्यधिक चैकाने वाला होगा और झाडू सबको साफ कर देगा।

सच्चाई यह है कि कोई भी होता यही करता,

आरूषी हेमराज हत्याकांड में आरूषी के पिता डा0 राजेश तलवार व डा0 नुपूर तलवार को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा दिया लेकिन आज भी छः घण्टे का रहस्य बरकारार है। वह रहस्य क्या है? आप भी गौर करिये.............
हम कोर्ट के फैसले पर सवाल नहीं उठाते लेकिन इस हत्याकांड में जिन-जिन प्रश्नों का जवाब नहीं मिला उसका जवाब खोजने का प्रयास कर रहे हैं। हम इस पूरे प्रकरण में मिडिया से प्रभावित नहीं हैं। हो सकता है ए प्रश्न आपको उटपटांग लगे लेकिन दिल से सोचेंगे तो आपको लगेगा कि यह आपने पहले क्यों नहीं सोचा। आईये उन प्रश्नों पर गौर करें जो कोर्ट के फैसले में नहीं हैं.............
मुद्दा 1. कोर्ट ने स्वयं माना कि आरूषी व हेमराज आपत्ति जनक स्थिति में (यानि एक दूसरे के साथ संभोग कर रहे थे।) जिसे देखकर डा0 राजेश तलवार तथा उनकी पत्नि नुपूर तलवार ने अपनी एकलौती बेटी सहित नौकर की हत्या कर दी।
सवाल- कौन है इसका चश्मदीद गवाह? कोई नहीं है, इसे कोर्ट कहता है।
मुद्दा 2. पैतालिस वर्षीय हेमराज नौकर व सत्रह वर्षीय आरूषी तलवार कोर्ट के ही हिसाब से संभोगरत थे तो क्या यह उचित है? कोर्ट बताये कि माता पिता का धर्म ऐसे दृश्य या कृत्य को देखकर क्या होना चाहिए? 
सवाल- क्या माता पिता को अपने बेटी व नौकर को ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर उन्हें इनाम देना चाहिए था? 
मुद्दा 3. भारतीय संविधान के अनुसार सौ गुनाहगार छूट जायें लेकिन एक बेगुनाह को सजा न होने पाये? क्या इस कांड में कोर्ट ने इस नियम का पालन किया? 
सवाल- 1. जैसा कि उपर लिखा गया है कि कोर्ट ने इस बात को स्वीकारा कि पूरे कांड का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है तो क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पैतालीस वर्षीय हेमराज, सत्रह वर्षीय आरूषी का बलात्कार करके हत्या कर दिया था जिसे देखकर आरूषी के माता पिता बौखला गये व नौकर हेमराज को अपने गोल्फ स्टिक से मार कर हत्या कर दिये, और उसी गोल्फ स्टिक के द्वारा यह अनुमान लगाया गया कि उसी से दोनों की हत्या की गयी।
सवाल- 2. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हेमराज आरूषी का जबरन बलात्कार कर रहा था और जोर जबरदस्ती में ही आरूषी को चोट आयी हो और उसी दौरान आरूषी की मृत्यू हो गयी। यह देख माता पिता उत्तेजना में हेमराज की हत्या कर दिये।
मुद्दा 4. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पैतालीस वर्षीय नौकर हेमराज सत्रह वर्षीय आरूषी के साथ बलात्कार का कांड कर रहा था तो हेमराज ने आरूषी को बलात्कार के दौरान मार दिया और आरूषी द्वारा बचाव में किये गये वार से बाद में हेमराज मर गया?
सवाल- सीबीआई भी इसका जवाब नहीं खोज पायी तो कोर्ट केवल मिडिया ट्रायल के दबाव में आरूषी के माता पिता को उम्र कैद की सजा देना सामाजिक व्यवस्थाओं पर जबरिया अंग्रेजी संस्कृति थोपने का कोर्ट कुकृत्य कर रही है। 
 

Sunday, 7 July 2013

लघु कथा-----दया

लघु कथा
दया


योर आनर.............. यह शख्स जो आज कटघरे में खड़ा मासूम नजर आ रहा हैयह इंसान नहीं दरिन्दा हैइंसान के नाम पर कलंक है इसने एक मासूम युवती के साथ अपना मुंह काला किया।
मजबूरियों का फायदा उठाने वाला यह वासना का पुजारी दया का पात्र नहीं, इसे धरा 376 के तहत कम से कम उम्र कैद की सजा अवश्य दी जायेयही आपसे गुजारिश हैयही न्याय है।
व्कील साहब बहस समाप्त करके अदालत से निकलकर अपने टिन रोड आफिस में पधारे। दूसरे मुकदमें की फाइल में उलझ गये। नितांत अकेले थे इस समय वे।
अचानक उनका ध्यान बंटा। एक नौजवान भिखारिन गोद में एक बच्चा लिये कह रही थी-‘ वकील साहब बच्चे को भूख लगी हैकुछ दे दीजिए
वकील साहब भिखारिन को ऊपर से नीचे तक निरीक्षण करते हुए बोले- ‘‘ भूख तो मुझे भी लगी है।’’
‘‘दया कीजिए वकील साहब बसदो रू.....................’’
मैने कहा न मुझे भी भूख हैतभी तो दया कर रहा हॅू। मेरी भूख मिटा दो। एकदो क्या सीधे बीस दूंगा। ये देख 20 रू.......................
भिखारन ने एक बार गोद में लिये अपने बच्चे को देखा। फिर अपने कांपते हाथ से 20 रूपये का नोट थाम लिया।


Tuesday, 23 April 2013

तकनीकी जानकारी


समाचारों तथा नयी तकनीकी जानकारीयों को आपतक पहुचाने का हमारा प्रयास उस समय बन्द हो गया जब आज से पॉच माह पहले हमारा ब्लाग ओपेन होना बन्द कर दिया मै भी काफी शान्त हो गया और ब्लागिंग करना बन्द कर दिया एक दिन आचानक गुस्सा आ गया कि आखिर क्यों मेरा ब्लाग क्यों बन्द हो गया और क्यों ओपेन नहीं हो रहा है। दिमाग खराब हो गया और सोचने लगा कि आखिर क्यों उपाय आया कि सबकुछ परिवर्तित किया जाया और परिवर्तित करने लगा ​तो देखा कि मेरा ब्लाग ठीक हो गया काफी खुशी का अनुभव किया दिल में उमंगों की लहरे हिलोर मारने लगी जैसे की मुझे वर्षों पुराना कोई चीज मिल गया वैसे ऐ भी तो सत्य है कि मेरा ब्लाग जो बन्द हो गया था काफी चिन्ता कर गया था मेरे मन में कितनी उम्मीदों से बनाया था इस ब्लाग को लेकिन आज हकीकत में काफी खुशी हुई ...........................................................................................
और अब जानकारीयों तथा समाचारों का पिटारा चलता रहेगा।